गीता ग्रंथ में प्रत्येक समस्या का समाधान निहित है- जोशी
टुडे राजस्थान न्यूज़ (अज़ीज़ भुट्टा )
हिन्दी विश्वभारती द्वारा स्व. पं. विद्याधर शास्त्री जी की 125वीं जयंती पर ‘गीता में जीवन प्रबंधन’ विषयक व्याख्यान का आयोजन
बीकानेर, 02 अगस्त। हिन्दी विश्वभारती, नागरी भंडार, बीकानेर द्वारा संस्थापक एवं प्रख्यात विद्वान स्व. पं. विद्याधर शास्त्री की 125वीं जयंती के अवसर पर ‘गीता में जीवन प्रबंधन’ विषयक एक गरिमामय व्याख्यान का आयोजन महाराजा नरेंद्र सभागार, नागरी भंडार, बीकानेर में किया गया। कार्यक्रम में शिक्षा, दर्शन, साहित्य तथा भारतीय ज्ञान-परम्परा से जुड़े विद्वानों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों एवं बुद्धिजीवियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रख्यात शिक्षाविद् एवं दार्शनिक प्रो. शिवनारायण जोशी (प्रो. (से.नि.), दर्शन शास्त्र, जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर) ने अपने व्याख्यान में कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता ऐसा दिव्य ग्रंथ है, जिसमें मानव जीवन की प्रत्येक समस्या का समाधान निहित है। उन्होंने कहा कि मनुष्य के जीवन में मोह और भय ही अधिकांश समस्याओं के मूल कारण हैं। यदि व्यक्ति इन दोनों पर विजय प्राप्त कर ले, तो उसका जीवन शांत, संतुलित और समृद्ध बन सकता है। उन्होंने गीता के अनेक श्लोकों का उद्धरण देते हुए निष्काम कर्मयोग की व्याख्या की तथा कहा कि फल की इच्छा का त्याग करते हुए कर्म करना ही वास्तविक सफलता और आत्मसंतोष का मार्ग है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि गीता केवल व्यक्तिगत मोक्ष का नहीं, बल्कि सामूहिक कल्याण और लोकमंगल का भी संदेश देती है, इसलिए आज के सामाजिक एवं व्यावसायिक जीवन में इसकी प्रासंगिकता और अधिक बढ़ जाती है।
विशिष्ट अतिथि डॉ. घनश्याम आत्रे ने अपने उद्बोधन में कहा कि गीता कर्म, ज्ञान और भक्ति—इन तीनों योगों का अद्वितीय समन्वय प्रस्तुत करती है। उन्होंने कहा कि गीता मानव जीवन के प्रत्येक प्रश्न का समाधान प्रदान करती है, आवश्यकता केवल इस बात की है कि व्यक्ति सही प्रश्न पूछना और उसके अनुरूप आत्मचिंतन करना सीखे।
कार्यक्रम के अन्य विशिष्ट अतिथि डॉ. मनमोहन सिंह यादव ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि गीता जीवन प्रबंधन का विश्व का सर्वश्रेष्ठ ग्रंथ है। आज केवल भारत ही नहीं, बल्कि सम्पूर्ण विश्व गीता के सिद्धांतों को व्यक्तिगत विकास, नेतृत्व क्षमता, निर्णय-निर्माण और नैतिक जीवन के मार्गदर्शक के रूप में स्वीकार कर रहा है। उन्होंने कहा कि गीता का संदेश समय, समाज और परिस्थितियों से परे सार्वकालिक एवं सार्वभौमिक है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता स्वामी संवित विमर्शानंद गिरि , अधिष्ठाता, मानव प्रबोधन प्रयास, शिवबाड़ी (बीकानेर) ने की। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने कहा कि गीता केवल मानव जीवन का ही नहीं, बल्कि सम्पूर्ण सृष्टि और ब्रह्माण्ड के संचालन का आध्यात्मिक एवं दार्शनिक आधार है। उन्होंने कहा कि गीता में निहित ज्ञान मानव को आत्मबोध, कर्तव्यबोध और विश्वबोध की ओर प्रेरित करता है तथा वर्तमान समय में इसकी शिक्षाएँ मानवता के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।
कार्यक्रम के प्रारम्भ में हिन्दी विश्वभारती के सचिव डॉ. राजेन्द्र कुमार ने संस्था की गतिविधियों का परिचय देते हुए व्याख्यान माला की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि हिन्दी विश्वभारती विगत छह दशकों से राजस्थान के इतिहास, भाषा, साहित्य, संस्कृति तथा भारतीय ज्ञान-परम्परा के संरक्षण और संवर्धन के लिए निरंतर कार्य कर रही है तथा यह व्याख्यान माला उसी श्रृंखला की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। उन्होंने बताया कि स्व. पं. विद्याधर शास्त्री जी के शिक्षा, भाषा और संस्कृति के क्षेत्र में दिए गए योगदान को नई पीढ़ी तक पहुँचाना संस्था का प्रमुख उद्देश्य है।
संस्थाध्यक्ष डॉ. गिरिजा शंकर शर्मा ने अपने स्वागत उद्बोधन में अतिथियों एवं उपस्थित सभी विद्वानों का अभिनंदन करते हुए कहा कि स्व. पं. विद्याधर शास्त्री जी ने हिन्दी विश्वभारती की स्थापना भारतीय संस्कृति, शोध एवं ज्ञान-विमर्श की समृद्ध परम्परा को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से की थी। उनके आदर्श आज भी संस्था के लिए प्रेरणास्रोत हैं।
कार्यक्रम के अंत में कोषाध्यक्ष डॉ. मोहम्मद फारूक चौहान ने सभी अतिथियों, विद्वानों एवं उपस्थित श्रोताओं का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का कुशल एवं प्रभावी संचालन संजय पुरोहित ने किया।
व्याख्यान माला में बड़ी संख्या में शिक्षकों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों, साहित्यकारों, समाजसेवियों तथा नागरिकों की उपस्थिति रही। कार्यक्रम ने भारतीय ज्ञान-परम्परा, विशेषकर श्रीमद्भगवद्गीता के जीवनोपयोगी संदेशों को समकालीन संदर्भों में समझने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया तथा उपस्थित श्रोताओं को जीवन-मूल्यों, कर्तव्यबोध और सकारात्मक जीवन-दृष्टि के प्रति प्रेरित किया।



