श्रीडूंगरगढ़ के दो भामाशाहों को मुख्यमंत्री ने किया सम्मानित

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श्रीडूंगरगढ़ बीकानेर, 25 जुलाई। भीखमचद जी की कर्म भूमि कोलकाता है। जहां पर विभिन्न संस्थाओं में सक्रिय रहकर मानव सेवा कर रहे हैं। लेकिन अपनी जन्म भूमि श्रीडूंगरगढ़ से सदा विशेष लगाव रहा है। परहित के लिए सदा चिंतन करने वाले मानव कल्याण स्वास्थ्य शिक्षा एवं सामाजिक धार्मिक संस्थाओं के प्रति सदैव समर्पित भाव से सेवा करते आ रहे हैं। श्रीमती सुशीला देवी पुगलिया जो अपने पति भीखम चंद जी को सदा ऐसे सन्मार्ग पर चलने के लिए सहभागी रहती है ।
24 जून को मुख्यमंत्री महोदय अशोक गहलोत द्वारा भीखम चद पुगलिया को प्राईड आफ राजस्थान सम्मान से सम्मानित किया गया। एक ही वर्ष के संकल्प से तुलसी सेवा संस्थान में विभिन्न चिकित्सकीय सुविधाओं का विस्तार कर चिकित्सालय की गरिमा को उच्च शिखरों पर पहुंचाया है। गुरुदेव आचार्य महाश्रमण जी के शुभ पदार्पण पर आपने अपने परिवार की ओर से अपनी जमीन पर होम्योपैथी और आयुर्वेदिक चिकित्सालय निर्माण की घोषणा की है। भीखमचंदजी सदैव ही शुभस्य शीघ्रम् में विश्वास रखते हैं। उनके द्वारा संपादित सारे कार्यों की सूची तो बहुत विस्तृत है। ऐसे परोपकार में लगे हुए लोगों का सम्मान होना तो सभी के मन प्रफुल्लित होना स्वाभाविक है। भीखम चंद जी की धर्म पत्नी सुशीला देवी पुगलिया ने मुख्यमंत्री महोदय अशोक गहलोत को भारत जैन महामंडल लेडिज विंग कोलकाता द्वारा संचालित गतिविधियों के बारे में बताया जिस पर मुख्यमंत्री महोदय ने प्रसन्नता व्यक्त की।

मोहनलाल सिंघी सुपुत्र तोलाराम सिंघी निवासी श्रीडूंगरगढ़ प्रवासी कटक भी विरल उदार व्यक्ति हैं, ।सदा हंस मुख प्रसन्न रहते है। गत वर्ष आपने पैतृक गांव समंदसर में एक विशाल और सुन्दर धर्मशाला का निर्माण जन हित में किया है। आप हर कार्य में दिल खोलकर अपना योगदान देते हैं। धर्म संस्थाओं के अलावा अन्य किसी जरूरतमंद की मदद करने में आपको प्रसन्नता होती है। आचार्य श्री महाश्रमण जी के श्री डूंगरगढ़ प्रवास पर आपकी सेवाएं अति प्रशंसनीय रही। मोहनलाल जी सिंघी को माननीय मुख्यमंत्री अशोक जी गहलोत के द्वारा प्राईड आफ राजस्थान के सम्मान से सम्मानित किया गया।

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