आकांक्षाओं के सीमाकरण से दुख होगा कम – मुनि जितेंद्र कुमार

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गंगाशहर /बीकानेर, 12 अगस्त। शांतिदूत आचार्य श्री महाश्रमण जी के अज्ञानुवर्ती मुनिश्री शांतिकुमार जी एवं मुनि श्री जितेंद्र कुमार जी ठाणा–9 के मंगल सान्निध्य में तेरापंथ भवन गंगाशहर में चातुर्मासिक प्रवास नित धर्माराधना के साथ सानंद प्रवर्धमान है। प्रतिदिन प्रातः एवं सायंकालीन प्रवचन के साथ–साथ जैन तत्व, सिद्धांत की अनेकों कार्यशालाएं भी आयोजित हो रही है। साथ ही श्रावक समाज द्वारा धर्मसभा में नित्य ॐ भिक्षु के सवालाख जाप का क्रम भी गतिमान है।

मुख्य प्रवचन में इतिहास की घटनाओं का वर्णन करते हुए मुनि श्री शांतिकुमार जी ने कहा– जीवन में ज्ञानार्जन का बहुत महत्व है। ज्ञान को कंठस्थ कर उसका पुनरावर्तन करते रहना चाहिए। स्वाध्याय से हमारे ज्ञान की वृद्धि होती है। ज्ञान के साथ–साथ ज्ञानयुक्त आचरण होने से जीवन में निखार आता है।

जैन आगम आधारित मुख्य उद्बोधन में मुनि श्री जितेंद्र कुमार जी ने कहा की हमारी यह आत्मा अनंत जन्मों से पुदगल परमाणुओं से जुड़ी हुई है, बंधी हुई है। पदार्थों का अनावश्यक संग्रह करने से हमे बचने का प्रयास करना चाहिए। परिग्रह, आसक्ति की भावना से हमारी आत्मा कर्मों से भारी होती चली जाती है। संसार में पदार्थ सीमित हो सकते है परंतु व्यक्ति की आकांक्षाएं असीमित है। असीमित आकांक्षाएं दुख का कारण बनती है। जरूरी है की हम अपनी इच्छाओं का सीमाकरण करे।

इससे पूर्व मुनि सुधांशु कुमार जी ने पुरुषार्थ की महत्ता पर प्रकाश डाला। मुनि अनेकांत कुमार जी ने सुमधुर गीत द्वारा मनुष्य जन्म सार्थक करने की प्रेरणा दी।

13 वर्षीय बालिका द्वारा अठाई तप
चातुर्मास काल में ज्ञान, जाप, तप में भी श्रद्धालु जन बढ़-चढ़ कर हिस्सा ले रहे है। आज कार्यक्रम में मुनिश्री के समक्ष श्री अशोक दुगड़ की सुपुत्री 13 वर्षीय तमन्ना दुगड़ ने आठ की तपस्या का प्रत्याख्यान किया। वहीं तपस्या के क्रम में श्री जयंत बैद की धर्मपत्नी श्रीमती अंकिता बैद ने पंद्रह की तपस्या एवं श्री सुशील दुगड़ की सुपुत्री सुश्री रुचिका दुगड़ ने तेरह की तपस्या का प्रत्याख्यान किया। अभी नगर में और भी अनेकों तपस्वी तपस्या के क्रम में आगे बढ़ रहे है।

स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित होगी भव्य भजन संध्या
अणुव्रत आंदोलन द्वारा देश के नैतिक उत्थान हेतु अपना जीवन समर्पित करने वाले राष्ट्रसंत आचार्य श्री तुलसी के समाधि स्थल नैतिकता के शक्तिपीठ पर 14 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या में रात्रि 08 बजे से भव्य भजन संध्या का आयोजन किया जायेगा। आचार्य तुलसी शांति प्रतिष्ठान के मंत्री श्री हंसराज डागा ने बताया की इस भजन संध्या में कर्नाटक से समागत सुश्री रितु दक एवं भीलवाड़ा के श्री ऋषि दुगड़ जैसे प्रसिद्ध संगायक अपनी प्रस्तुति देंगे। साथ ही 14 अगस्त को प्रातः शक्तिपीठ पर ‘असली आजादी अपनाओं’ विषय पर मुनिश्री के सान्निध्य में कार्यक्रम होगा। प्रतिष्ठान द्वारा इस दिन सम्मान समारोह एवं तेरापंथ सभा, गंगाशहर द्वारा ज्ञानशाला दिवस भी मनाया जायेगा।

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