गच्छाधिपति आचार्य, विजय इंद्रदिन्न सूरिश्वरजी के जन्म शताब्दी दिवस पर जप,तप त्याग

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बीकानेर, 19 अक्टूबर। जैन श्वेताम्बर तपागच्छ के गच्छाधिपति आचार्य श्रीमद्् विजय इंद्रदिन्न सूरिश्वर महाराज के 99 वें जन्म दिवस व जन्म शताब्दी वर्ष के प्रथम दिन बुधवार को रांगड़ी चौक की तपागच्छीय पौषधशाला में जप,तप, त्याग, चारित्र, प्रवचन, गुणानुवाद सभा हुई तथा 100 दीयों की दीपमाला से गुरुदेव का स्मरण व वंदन किया गया।


साध्वी सौम्यप्रभा, सौम्यदर्शना, अक्षय दर्शना व परम दर्शना के सान्निध्य में हुए कार्यक्रम में अनेक श्रावकन्श्राविकाओं ने जिनालयों में दर्शन करने, विभिन्न तरह की तपस्याएं करने, अभक्ष्य वस्तुओं का त्याग करने तथा परमात्मा का स्मरण करते हुए जैन धर्म के अनुसार साधना-आराधना व भक्ति के नियमों का संकल्प लिया। राजस्थान संस्कृत अकादमी की अध्यक्ष डॉ.सरोज कोचर, महक रामपुरिया, जितेन्द्र कोचर, साध्वीवृंद चातुर्मास संयोजक सुरेन्द्र बद्धानी ने गच्छाधिपति आचार्य विजय इन्द्रदिन्न सूरिश्वरजी के आदर्शों का स्मरण दिलाया। वरिष्ठ श्रावक सुरेन्द्र बद्धानी ने साधार्मिक फड़ राशि का विसर्जन किया। महेन्द्र, विमल, रोनक व रोहित कोचर ने भक्तिगीतों से वंदना की। अनेक बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने आयम्बिल की तपस्या की।


महासंक्रांति पर्व
साध्वी सौम्यप्रभा व सौम्य दर्शना आदिठाणा के सान्निध्य में मंगलवार को महासंक्रांति पर्व प्रेरणादायक नाट््य प्रस्तुत, भक्ति गीतों के साथ मनाया गया। नाटक आंदोलन में बच्चों ने अधिक मोबाइल का उपयोग करने, व्यसन सहित विभिन्न सामाजिक बुराइयों से बचने का संदेश रोचक तरीके से दिया। वयोवृद्ध श्रावक रिखब चंद नाहर सहित अनेक कलाकारों ने भक्ति गीत प्रस्तुत किए। नवपद ओली प्रश्नोतरी प्रतियोगिता में अव्वल रहे प्रतियोगियों को राजेन्द्र कुमार, शिखर चंद,कमलचंद, रामलाल, कांति लाल बरड़िया परिवार की ओर से सम्मानित किया।

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