सब हक़ीक़त बयान कर देंगी, ख़ूब रखती हैं ये हुनर आंखें
बीकानेर-01जनवरी। पर्यटन लेखक संघ-महफिले अदब की साप्ताहिक काव्य गोष्ठी की 561वीं कड़ी में रविवार को होटल मरुधर हेरिटेज में हिंदी-उर्दू के रचनाकारों ने कलाम सुना कर दाद लूटी।
कवि कमल किशोर पारीक की अध्यक्षता व शिक्षाविद प्रो टी के जैन के मुख्य आतिथ्य में आयोजित गोष्ठी में वरिष्ठ शाइर ज़ाकिर अदीब ने आंखें रदीफ़ से ग़ज़ल सुना कर वाह वाही हासिल की।

सब हक़ीक़त बयान कर देंगी
ख़ूब रखती हैं ये हुनर आंखें
आयोजक डॉ ज़िया उल हसन क़ादरी ने दोस्तों पर शेर सुनाये-
इख्लास दोस्तों में, भी बाक़ी नहीं रहा
जाते हैं वो उधर कि जिधर फाएदा है आज-
असद अली असद ने गम्भीर शेर सुनाये-
फिर आसमाँ की आंख से टपका है जो लहू
शायद ज़मीं पे ज़ुल्म हुआ फ़िर किसी के साथ
शाइर वली मुहम्मद गौरी वली नए साल पर नज़्म सुनाई।

आज महकी हुई लग रही है फ़ज़ा
है मुअ़त्तर – मुअ़त्तर जहां की हवा
मरहबा मरहबा साल आया नया
इम्दादुल्लाह बासित ने “उम्र बीत जाती है आशियाँ बनाने में”, युवा शाइर मुहम्मद मुईन ने “ये बहारे-बागे-दुनिया चार दिन”,प्रो नरसिंह बिनानी ने “मंगलमय अंग्रेज़ी 2023 नववर्ष” व डॉ जगदीश दान बारहठ ने “सीख ले सच पर चलना अटल ज़िन्दगी”सुना कर कार्यक्रम की शोभा बढाई।




