मनीष के राजस्थानी बाल उपन्यास मोळियो का लोर्कापण

0
247

टुडे राजस्थान न्यूज़

बीकानेर। 29 जनवरी। आज अजित फाउण्डेळशन में उपन्यासकार मनीष कुमार जोशी के राजस्थानी बाल उपन्यास मोळियो का लोकार्पण हुआ। इस अवसर बोलते हुए कार्यक्रम के अध्यक्ष और साहित्य्कार राजेन्द्र जोशी ने कहा कि बच्चोरके लिए कोई भी लेखन बाल मनोविज्ञान को समझे बिना नहीं हो सकता है और जब तक बच्चो् के लिए लिखा गया साहित्य बच्चो को पसंद नहीं आता है तब तक उस साहित्य की सार्थकता नहीं रहती है। उन्होने मोळियो Vara बच्चो के साथ साथ अभिभावको के लिए भी जरूरी पुस्तक बताया। विशिष्ठ अतिथि हरिशंकर आचार्य ने मोळियो को बच्चो की भाषा में लिखी गयी बच्चो की पुस्तक बताया। उन्होने कहा कि इसमें बच्चो की पीडा को बालमनोविज्ञान के जरिये बतायी गयी है। विशिष्ठ‍ अतिथी समाजसेवी और उद्योगपति राजकुमार व्यास ने राजस्थानी में लेखन करने का महत्व बताया और कहा कि बच्चो के लिए सबसे अच्छा लेखन उनकी मातृभाषा में हो सकता है। लेखक को पुस्तकक के लिए बधाई देते हुए कहा कि प्रवासी राजस्थानी अपनी भाषा में लिखी गयी पुस्तक को ज्यादा चाव से पढ्ते है। इससे पूर्व व्यंग्य्कार आत्माराम भाटी ने उपस्थित गणमान्य व्यक्तियो का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजनो से राजस्थनी भाषा का मान बढ्ता है।


कार्यक्रम के मुख्यप अतिथि और नेहरू बाल साहित्य‍ अकादमी के उपाध्य क्ष बुलाकी शर्मा ने कहा कि मोळियो पुस्तक बालमनोविज्ञान को अच्छी तरीके समझाती है। उन्होने कहा कि बच्चो के लिए लिखने के लिए लेखक को बच्चा बनना पडता है। बच्चो को समझे बिना बाल साहित्य नहीं लिखा जा सकता है। मोळियो बच्चोा के मन के भावो को उजागर करता है। उन्होने राजस्था‍नी में बाल उपन्यातस के आने को साहित्य के लिए बहुत बडी उपलब्धि बताया।
कार्यक्रम में मोळियो पुस्तक के लेखक मनीष कुमार जोशी ने कहा कि पुस्तक पर चर्चा के दौरान पुस्तक के कथ्य पर बात होनी चाहिए। उन्होने कहा कि मोळियो हर व्यक्ति के बचपन की कहानी है। हर एक व्यक्ति उन परिस्थितियो से गुजरा है जिन परिस्थितियो का उल्लेख मोळियो में है। लेखक का परिचय नदीम अहमद नदीम ने दिया।
कार्यक्रम में पत्र वाचन साहित्यकार सुनील गज्जाणी ने किया। उन्हो्ने पत्र वाचन करते हुए पुस्तक की खूबियो ओर कमियों की चर्चा की। उन्होने कहा कि मोळियो बाल साहित्य के क्षेत्र में एक अनूठी पुस्तक है। यह उपन्या स तत्कालिक परिवेश और पौराणिक परिवेश के बीच सामंजस्य रखा गया है। चित्रकार योगेन्द्र पूरोहित और नन्ही चित्रकार दिशा पूरोहित का सम्मा‍न किया गया। लेखक ने उपस्थित गणमान्य व्यक्तियो को पुस्तके भेंट की।
कार्यक्रम का संचालन केन्‍द्रीय साहित्यअकादमी नई दिल्ली से पुरस्का र प्राप्त संजय पूरोहित ने किया। संजय पूरोहित ने कार्यक्रम की रूपरेखा बताते हुए लेखक मनीष कुमार जोशी के सृजन यात्रा की चर्चा की। इससे पूर्व सरस्वती के चित्र पर माल्यामर्पण कर कार्यक्रम की विधिवत शुरूआत की गयी। कार्यक्रम में वरिष्ठ साहित्यकार राजाराम स्वपर्णकार, डा अजय जोशी, समीर भोजक समीर, कमल व्या स, जितेन्द्रि पूरोहित, योगेन्द्र पुरोहित, गोविन्दं व्यास, अनिल जोशी, संजय श्रीमाली, संतोष किराडू, गोविन्द व्यास और शिवजीराज आचार्य उपस्थित थे।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here