आत्मा स्वरूप की पहचान कराता है स्वाध्याय मुनि-चैतन्य कुमार “अमन “

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टुडे राजस्थान न्यूज़( अज़ीज़ भुट्टा )


भीनासर ,13 सितंबर। पर्युषण महापर्व के आज दूसरे दिन तेरापंथ भवन भीनासर में भगवान महावीर के भव परम्परा से गुजरते हुए आगामी भवों का वर्णन किया। मुनिश्री चैतन्यकुमार अमन “ने श्रावक समाज को सम्बोधित करते हुए कहा- नयसार के भव में भगवान महावीर की आत्मा को संत समागम का योग मिला। सरल परिणामी भक्ति पूर्वक सन्तों की सेवा करने से उनकी आत्मा ने प्रथम बार सम्यक्त्व को प्राप्त किया जो उनकी आत्मा को मोक्ष की दिशा में अग्रसर होने का कारण बना।
मुनि अमन ने स्वाध्याय दिवस पर बोलते हुए कहा- अपने आत्म स्वरूप की पहचान कराता है स्वाध्याय । स्वाध्याय वह दर्पण है – जिसमें स्वयं को सुधारने की व्यवस्था है।

अच्छे साहित्य का पठन करने से ज्ञान का विकास, समय का सदुपयोग, भावनाओं में परिवर्तन होता है। बार-बार पठन करने से शास्त्र भी स्थिर हो जाते है। वर्तमान में व्यक्ति मोबाईल में इतना व्यस्त हो जाता है कि उसके पास सत्साहित्य पठन के लिए समय ही नहीं है और यह भी कहा जा सकता है कि मोबाईल में ही अपना सारा समय खो देता है कि वह सत्साहित्य पढ़े कब । यद्यपि प्रिन्ट मिडिया और इलेक्ट्रोनिक मीडिया के द्वारा मोबाईल के कारण बच्चों के स्वास्थ्य और मन पर होने वाले दुष्प्रभाव के बारे में बहुत सारी जानकारी प्रदान की जाती है फिर आज का इंसान मोबाईल का इतना दुरुपयोग करता है जिसका परिणाम वर्तमान में देखने को मिल रहे हैं और भविष्य तो निश्चित रूप अंधकारमय ही होने वाला है।

इस अवसर मुनि प्रबोध कुमार जीने पर्युषण आराधना करते हुए आत्म साधना में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। पर्युषण महापर्व के अन्तर्गत अखंड जप एवं सांय प्रतिक्रमण के साथ प्राणी मात्र के प्रति क्षमा याचना की। इस अवसर पर तेरापंथी सभा के मंत्री महेन्द्र बैद ने श्रावक निष्ठापत्र का वाचन किया ।महिला मंडल सदस्याओं ने गितिका के द्वारा मंगलाचरण किया ।

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