दीपावली का पर्व अनेक महापुरुषों से जुड़ा हुआ पर्व है- मुनि चैतन्य कुमार अमन
टुडे राजस्थान न्यूज़ ( अज़ीज़ भुट्टा )
भीनासर , 11 नवंबर । तेरापंथ भवन- भीनासर में त्रिदिवसीय आध्यात्मिक अनुष्ठान के आज दूसरे दिन मुनिश्री चैतन्य कुमार अमन भगवान महावीर के निर्वाण महोत्सव पर धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए कहा – दीपावली का पर्व प्रकाश का पर्व है, ज्योति का पर्व है। ज्ञान प्रकाशकर है, ज्ञान का प्रकाश आन्तरिक प्रकाश है। आज की रात्रि में लोग दीपावली मनाते है। दीपक का प्रकाश करके लोग बाहर के अन्धकार को दूर करने का प्रयास करते है किन्तु आवश्यकता है अज्ञान के को तमस दूर करके ज्ञान का प्रकाश प्राप्त करने कि दिशा में आगे बढ़ने का प्रयत्न किया जाय।

मुनि अमन ने आगे कहा- दीपावली का पर्व अनेक महापुरुषों के साथ जुड़ा हुआ पर्व है। जैन परम्परा में भगवान महावीर ने निर्वाण प्राप्त किया तो महावीर अन्तेवासी शिष्य गणधर गौतम ने केवल ज्ञान को प्राप्त किया था। सनातन धर्म के अनुसार मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम ने इस दिन जन्मभूमि अयोध्या में प्रवेश किया था। आर्य समाज के अनुसार स्वामी दयानन्द सरस्वती ने आर्य समाज संगठन का प्रारंभ किया था। आज आवश्यकता है प्रत्येक धर्म का अनुयायी अपने आराध्य के प्राप्त संदेशों को जीवन में आत्म सात लक्ष्मी पूजन के साथ अपने आचरणों का परिष्कार करे तथा जीवन में आत्म ज्योति को प्राप्त करे।
मुनि अमन ने आज के दिन अनेक घरों में पगलिए कर मंगल पाठ सुनाया। सर्व रिद्धि सिही मंत्रों, स्तोत्रों, स्तवानो का संगान सामुहिक रूप से करवाया गया। आज रूप चतुर्दशी होने से मर्यादा पत्र का वाचन भी किया गया। अनेक श्रावक-श्राविकाओं ने तपस्या का प्रतारण्यात किया। इस अवसर पर भावकों की उपस्थिति अच्छी रही। मुनि प्रबोध कुमारजी भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे। संवाद दाता पारस गंग ने रिपोर्ट तैयार की।

इस अवसर पर श्री श्रेयांस सेठिया ,श्वेता बोथरा , सारिका सेठिया, कमला देवी बोधरा , जेठी देवी बोधरा ने तेले के अनुष्ठान द्वारा भगवान महावीर के प्रति अपनी श्रद्धा अर्पित की। मुनि अमन ने बताया-दिनांक 15 नवम्बर 23 को आचार्य श्री तुलसी का 110 के जन्म दिवस अणुव्रत दिवस के रूप में मनाया जाएगा। इस अवसर पर उपवास, एक्शन तप के साथ अभ्यर्थना की जाएगी। मुख्य वक्ता के रूप मे अतिरिक्त आयुक्त उद्योग एवं 1 वाणिज्य विभाग जयपुर राजेंद्र सेठिया होंगे ।- गुरुदेव तुलसी ने अपने जन्म दिन को अणुव्रत के रूप समर्पित कर दिया। अत: इस दिन को अनुव्रत दिवस के रूप मनाया जाता है।



