समय का सदुपयोग सफल जीवन का प्रथम सूत्र-मुनि चैतन्य कुमार अमन

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टुडे राजस्थान न्यूज़ ( अज़ीज़ भुट्टा )


बीकानेर 21 जनवरी । तेरापंथ भवन गंगाशहर मे रविवारीय विशेष प्रवचन के अन्तर्गत “कौशल समय प्रबंधन” का विषय पर बोलते हुए मुनिश्री चैतन्य कुमार” अमन ने कहा- आज का युग मैनेजमेंट का कहा जाता है। सफल व्यक्तित्व वही होता है जो समय वाणी भावना का सार्थक प्रबंधन करना जानता है। समय को पहचानना बहुत बडा विज्ञान है । समय की पहचान का अभाव होने से बहुत सारे व्यक्ति अपने कार्य क्षेत्र में सफल नहीं हो पाते। कब क्या करना इसका बोध होना आवश्यक है। जीवन में ज्ञानार्जन, धर्मार्जन, पुण्यार्जन धनार्जन का अपना समय होता है। सफलता का राज है समय पर कार्य करना । उसे भी व्यवस्थित रूप से करना । समय नियोजन करना जीवन की बड़ी कला है।

मुनि अमन ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा- अध्यात्म के क्षेत्र में ज्ञानार्जन का एक समय होता है जो गंभीर मंत्रों को सिद्ध करने का समय होता है। असमय में किया मंत्रानुष्ठान शारीरिक अथवा मानसिक पीड़ा भी पहुंचा सकते हैं। जैसे ओपरेशन के समय रोगी को इन्फेक्सन से बचाना जरूरी होता है वैसे ही विशेष मंत्रों एवम् ‌शास्त्रो का स्वाध्याय करने में समय का ध्यान रखना बहुत जरूरी होता है। समय की अनुकूलता कार्य की सफलता का मुख्य कारण है। व्यवहार अध्यात्म, व्यापार-व्यवसाय आदि सभी क्षेत्रो मे समय को नियोजित करना अपेक्षित है। व्यक्ति को समय ज्ञाता – विज्ञाता होना चाहिए।

मुनि श्रेयांस कुमारजी ने सुमधुर गीत प्रस्तुत किया। इस अवसर पर ज्ञानशाला के ज्ञानार्थीयो का परीक्षा परिणाम घोषित किया गया। ज्ञानशाला के प्रथम भाग में दक्ष रांका, चेरी बोथरा प्रथम, मनस्वी चौपडा मान्या चौपड़ा दीपांकर छाजेड़ द्वितीय, द्वितीय भाग में मान्या भुगड़ी हिमाशु छाजेड प्रथम, चिन्मय डागा, कृति बणोट द्वितीय, तीसरे भाग में सृष्टि ललवाणी प्रथम, निशांत ललवानी दितीय, चतुर्थभाग में पलक जैन प्रथम, आराध्या पुगलिया द्वितीय, पंचमभाग मे नुपुरनाहर प्रथम धरणेन्द्र चोरडिया द्वितीय तीसरे स्थान पर शुभम बोहरा रहा। तेरापंथी सभा के मंत्री रतन ‌छलाणी, ज्ञानशाला कार्यकर्ता चैतन्य रांका रजनीश गोलछा, देवेन्द्र डागा व विनीत बोथरा उपस्थित थे।

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