सादिक साहब की 27वीं पुण्यतिथि पर हुई ऑनलाइन साहित्यिक संगोष्ठी

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टुडे राजस्थान न्यूज़ (अज़ीज़ भुट्टा )

स्वर्गीय सादिक साहब की 27वीं पुण्यतिथि पर ऑनलाइन साहित्यिक संगोष्ठी आयोजित
रिपोर्ट-कौसर भुट्टो

बीकानेर/दुबई/नीदरलैंड, 02 जून। प्रसिद्ध साहित्यकार स्वर्गीय जनकवि सदीक भाटी जी की 27वीं पुण्यतिथि के अवसर पर एक अंतर्राष्ट्रीय ऑनलाइन साहित्यिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें बीकानेर, यूएई और नीदरलैंड सहित विभिन्न देशों के साहित्य, कला एवं संस्कृति से जुड़े अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने भागीदारी की।

कार्यक्रम का संचालन सदीक साहब की पोती कौसर भुट्टो ने किया। संगोष्ठी का शुभारंभ हिंदी साहित्य एवं मीडिया जगत की प्रतिष्ठित हस्ती तथा पूर्व उपमहानिदेशक, आकाशवाणी, लक्ष्मी शंकर बाजपेयी ने किया। उन्होंने बीकानेर में अपने कार्यकाल के दौरान सदीक साहब के साथ बिताए संस्मरण साझा किए और उनका लोकप्रिय गीत “तुम्हें जिंदगानी सुहानी मिली है” प्रस्तुत कर कार्यक्रम को भावुक रंग दिया।

यूएई से सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. आरती ‘लोकेश’ ने सदीक साहब की चर्चित काव्यकृति “अभी अंधेरा है” पर समीक्षात्मक वक्तव्य प्रस्तुत किया। उन्होंने उनके साहित्य में समाज की गहरी संवेदनाओं और यथार्थवादी दृष्टिकोण की सराहना की।

कार्यक्रम में यूएई के कौशल अवस्थी ने सदीक साहब का प्रसिद्ध गीत “बाबा थारी बकरियां” सुनाकर सभी का दिल जीत लिया, वहीं उनकी धर्मपत्नी कविता अवस्थी ने “म्हे धरती का लाड़ेसर हां” गीत प्रस्तुत किया।

बीकानेर के प्रतिष्ठित साहित्यकार बुलाकीदास बावरा जी के सुपुत्र, संजय पुरोहित , जो खुद भी एक सुस्थापित साहित्यकार हैं, ने सदीक साहब के साथ जुड़े संस्मरण साझा किए और उनकी पुस्तक “अंतस तास ” पर समीक्षात्मक प्रकाश डाला।

नीदरलैंड से साहित्यसेवी एवं अनुवादक राम तक्षक ने सदीक साहब के साहित्य के प्रचार-प्रसार के लिए अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालयों में शोध कार्य करवाए जाने का सुझाव दिया।

यूएई की चित्रकार, गायिका एवं बायोकेमिस्ट डॉ. सीमा उपाध्ये जी ने सदीक साहब की ग़ज़ल “तुम्हें जिंदगानी सुहानी मिली है” की संगीतमय प्रस्तुति देकर आयोजन को और भी अविस्मरणीय बना दिया।

कार्यक्रम के समापन पर कौसर भुट्टो ने सदीक साहब का लोकप्रिय गीत “थे मजा करो महाराज” सुनाया और सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया।
कौसर भुट्टो ने बताया कि यह आयोजन केवल एक श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि सदीक साहब की साहित्यिक धरोहर को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

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