पापों को खपाने का नाम है तप- साध्वी जिनबाला
टुडे राजस्थान न्यूज़ ( अज़ीज़ भुट्टा )
पापों को खपाने का नाम है तप – साध्वी जिनबाला
बीकानेर 20 जुलाई । महातपस्वी परम् यशस्वी आचार्य श्री महाश्रमण जी की सुशिष्या साध्वीश्री जिनबाला जी के सान्धिय में भीनासर तेरापंथ भवन में तप अनुमोदन समारोह रखा गया।
स्व ओमप्रकाश सेठिया की धर्मपत्नी ममोल देवी सेठिया ने 14 दिन की तपस्या का प्रत्याख्यान किया इस उपलक्ष्य में साध्वी श्री जिनबाला जी ने तप शब्द को व्याख्यातित करते हुए फरमाया – ” तापयति पापम् इति तपः ” जो कर्मों को खपाता है जो पापों को तपाता है वह तप है तप के द्वारा विघ्न , कष्ट , संकट का स्वतः निवारण हो जाता है तप व्यक्ति के भीतर इष्ट शक्ति को मजबूत करता है।
साध्वी भव्य प्रभा जी ने तप के महत्व पर प्रकाश डाला
इस अवसर पर तेरापंथ महिला मण्डल अध्यक्षा शशि गोलछा ने पूरी महिला मण्डल की तरफ से तप अनुमोदन किया महिला मण्डल ने सामूहिक गीतिका का संगान किया साहित्य व सामायिक उपकरणों से ममोल बाई का तप अभिनन्दन महिला मण्डल ने किया।

परिवार की बहु बेटियों ने मम्मीजी का तप अनुमोदन करते हुए गीत का संगान किया।
रणजीत जी सेठिया ने कार्यक्रम का संयोजन किया।
उपस्थित लगभग 150 भाई बहनों ने तप की सराहना की।



