निजी क्षेत्र के व्यक्तियों की शीर्ष पदों पर नियुक्ति का किया विरोध
टुडे राजस्थान न्यूज़ (अज़ीज़ भुट्टा )
बीकानेर 12 अक्टूबर । एल.आई.सी. और सार्वजनिक क्षेत्र की सामान्य बीमा कंपनियों में निजी क्षेत्र के व्यक्तियों की शीर्ष पदों पर नियुक्ति का बीमा कर्मचारियो के सबसे बड़े संगठन ऑल इण्डिया इंश्योरेंस एंप्लॉयज एसोसिएशन (AIIEA) ने विरोध किया है।
ऑल इण्डिया इंश्योरेंस एंप्लॉयज एसोसिएशन (AIIEA) ने मंत्रिमंडलीय नियुक्ति समिति (ACC) द्वारा हाल ही में जारी उस कार्यकारी आदेश के प्रति कड़ा और स्पष्ट विरोध दर्ज किया है, जिसके माध्यम से एल.आई.सी., सार्वजनिक क्षेत्र की सामान्य बीमा कंपनियों (PSGI) और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, जिनमें भारतीय स्टेट बैंक भी शामिल है, के पूर्णकालिक निदेशक (WTDs), प्रबंध निदेशक (MDs), कार्यकारी निदेशक (EDs) तथा अध्यक्षों की नियुक्ति के लिए “संशोधित समेकित दिशा-निर्देश” (revised consolidated guidelines) स्वीकृत किए गए हैं।

ये संस्थान संसद द्वारा पारित अधिनियमों — एल.आई.सी. अधिनियम 1956, जी.आई.बी.एन.ए. अधिनियम 1972 तथा भारतीय स्टेट बैंक अधिनियम 1955 — के तहत संचालित होते हैं। इनके प्रबंधन ढांचे, भूमिकाओं और नियुक्ति की प्रक्रिया इन कानूनों में स्पष्ट रूप से निर्धारित हैं। इन सक्षम अधिनियमों में संशोधन किए बिना नए दिशा-निर्देश जारी करना कार्यपालिका द्वारा अतिक्रमण (executive overreach) है और यह संसदीय अधिकार को कमजोर करता है।
यह कदम राष्ट्रीयकरण की उस मूल भावना पर प्रहार करता है जिसने यह सुनिश्चित किया था कि बैंकिंग और बीमा का संचालन निजी मुनाफे के बजाय जनहित के लिए हो। संशोधित दिशा-निर्देश इन सफल सार्वजनिक वित्तीय संस्थानों में निजी क्षेत्र के बढ़ते प्रभाव और अंततः उनके निजीकरण का मार्ग प्रशस्त करते हैं। यह न केवल राष्ट्र की आर्थिक संप्रभुता के लिए खतरा है, बल्कि जनता की बचत की सुरक्षा को भी संकट में डाल सकता है।
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक और बीमा कंपनियाँ देश में समावेशी विकास और सामाजिक सुरक्षा की रीढ़ रही हैं। इनके सार्वजनिक चरित्र को कमजोर करने या संसद और जनता से नियंत्रण हटाने के किसी भी प्रयास को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
इन महत्वपूर्ण संस्थानों के शीर्ष पदों को निजी कॉर्पोरेट क्षेत्र से आने वाले बाहरी व्यक्तियों के लिए खोल देना उन अधिकारियों का मनोबल गिरा देगा जो वर्षों से इन संस्थानों की निष्ठापूर्वक सेवा कर रहे हैं। इससे आंतरिक पदोन्नति और करियर उन्नति की स्वाभाविक प्रक्रिया बाधित होगी। ए.पी.ए.आर. (APAR) आधारित मूल्यांकन प्रणाली को हटाना और निजी मानव संसाधन एजेंसियों के माध्यम से “व्यवहारिक मूल्यांकन” (behavioural assessment) लागू करना उन नियुक्ति प्रावधानों की मूल भावना को नष्ट करेगा जिन्हें संसद ने निर्धारित किया है।
अतः ए.आई.आई.ई.ए. सरकार से इन संशोधित दिशा-निर्देशों को तुरंत वापस लेने की मांग करता है। संगठन का आह्वान है कि सरकार संसदीय प्रक्रियाओं, सार्वजनिक स्वामित्व और पारदर्शी विचार-विमर्श की परंपरा का सम्मान करे और ऐसे दूरगामी नीतिगत निर्णय बिना संवाद के लागू न करे।
निवेदक
शौकत अली पंवार
मंडल सचिव
ऑल इण्डिया इंश्योरेंस एंप्लॉयज एसोसिएशन
मंडल समिति बीकानेर।


