भीतर व बाहर की कश्मकश दिखा गया नाटक ‘खिड़की’

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टुडे राजस्थान न्यूज़ (अज़ीज़ भुट्टा )

भीतर व बाहर की कश्मकश दिखा गया नाटक खिड़की
अर्जुन राम मेघवाल ने की कलाकारों से मुलाकात

बीकानेर 19 फरवरी। संकल्प नाट्य समिति बीकानेर के तत्वावधान में स्वः आनंद वी आचार्य की स्मृति में चल रहे पांच दिवसीय सातवें राज्य स्तरीय नाट्य समारोह के दूसरे दिन बुधवार को समर्थ ठिएटर की तरफ से विकास बहारी के लिखे नाटक खिड़की का प्रभावी मंचन युवा निर्देशक विनोद पारीक के निर्देशन में किया गया।

नाटक एक साधारण से कमरे में रहने वाले असाधारण लेखक की कथा के माध्यम से मन की यात्राओं, रचनात्मक पीड़ा, मानवीय संवेदनाओं की तहों को खोलता हुवा सवाल उठाता है की कल्पना-हकीकत तथा भीतर व बाहर के बीच कोई फर्क है क्या ? नाटक का संवाद बेकार की सम्भावनाओ के जाल में घुसना जितना खूबसूरत होता है, समय के साथ उतना ही ख़तरनाक हो जाता है दर्शकों को द्रवित कर गया। प्रमुख भूमिकाओं में संजय भुल, शैलेन्द्र सिंह भाटी, अनमोल प्रीत कौर व रोहित वाल्मिकी ने प्रभावी अभिनय किया। संगीत प्रभाव अमित पारीक, मंच परिकल्पना शिल्पा पारीक, प्रकाश प्रभाव पंकज व्यास, प्रकाश परिकल्पना सुरेश पूनिया, रूप सज्जा देवयानी तथा प्रस्तुति मार्ग दर्शन दिलीप सिंह भाटी का था। मंचन के मुख्य अतिथि केंद्रीय क़ानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने बीकानेर की रंगमंच परम्परा का जिक्र करते हुवे कहा की बीकानेर के कलाकारों ने राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति दर्ज की है। इस अवसर पर राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष अर्जुन देव चारण, वरिष्ठ साहित्यकार बृज रतन जोशी, वरिष्ठ रंगकर्मी प्रदीप माथुर, अविनाश व्यास, राजेंद्र जोशी भी उपस्थित रहे।

नाटक डाक घर का मंचन आज
संस्था के अध्यक्ष विद्यासागर आचार्य ने बताया की समारोह के तीसरे दिन टौंक के नाट्य दल द्वारा रविंद्र नाथ टेगौर के लिखे नाटक डाकघर का मंचन चितरंजन नामा के निर्देशन में किया जायेगा।

खूब हसाया दुलारी बाई ने
रंग आनंद नाट्य समारोह शुरू

संकल्प नाट्य समिति बीकानेर के तत्वावधान में स्वः आनंद वी आचार्य की स्मृति में पांच दिवसीय सातवें राज्य स्तरीय नाट्य समारोह की शुरुआत आज टाउन हाल में राज्य के पूर्व गृह मंत्री वीरेंद्र बेनीवाल, पश्चिम बंगाल सरकार के दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री स्वपन बर्मन सपन दा, राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष अर्जुनदेव चारण, संवित स्वामी श्री विमर्शानंद जी महाराज, वरिष्ठ रंगकर्मी एस डी चौहान, प्रदीप भटनागर, डॉक्टर आभा शंकर के कर कमलों से हुई।

समारोह के पहले दिन अनुराग कला केंद्र की तरफ से मणि मधुकर के लिखे नाटक दुलारी बाई का प्रभावी मंचन वरिष्ठ रंगकर्मी सुधेश व्यास के निर्देशन में किया गया। केंद्रीय पात्र दुलारी बाई के लालच, उसकी धन लिप्सा तथा उससे उपजी समस्याओं को मनोरंजक लोक शैली में प्रस्तुत करता यह नाटक ग्रामीण परिवेश को भी बखूबी प्रस्तुत करने में सफल रहा। चुटीले संवाद, प्रभावी अभिनय से प्रेक्षगृह रह रह कर ठहाकों से गूंजता रहा। नाटक में प्रियंका आर्य, के के रंगा, सुनील जोशी, सुरेंद्र स्वामी, अशोक व्यास, मुकेश सेवग, विकास शर्मा, आमिर, उत्तम सिंह, वेदांगना आचार्य ने विभिन्न भूमिकाओं को जीवंत किया। संगीत राजेंद्र झूंझ का था तथा कौरस में काननाथ गोदारा, राहुल चावला, आयुष व्यास, वसुंधरा, रिया, डैनी धवल ने अपने स्वर दिये। इस अवसर पर निर्देशक तथा कलाकारों का सम्मान किया गया। संचालन संजय पुरोहित ने किया।

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