शारदा भारद्वाज “सदफ” के दूसरे नज़्म संग्रह “शबनमी मंजर” का हुआ विमोचन
टुडे राजस्थान न्यूज़ (अज़ीज़ भुट्टा )
बीकानेर , 05 अप्रैल। पर्यटन लेखक संघ -महफ़िले अदब के तत्वावधान में शारदा भारद्वाज “सदफ” के दूसरे नज़्म संग्रह “शबनमी मंजर” का विमोचन रविवार को गंगाशहर रोड़ स्थित होटल मरुधर हेरिटेज में किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए बीकानेर के वरिष्ठ शायर जाकिर अदीब ने कहा कि शारदा भारद्वाज को उर्दू शायरी से लगाव है।उन्होंने बी ए और एम ए में उर्दू साहित्य पढ़ा है।इसीलिए वो उर्दू में शायरी करने का प्रयास करती है।उम्मीद है इसमें धीरे धीरे निखार आएगा।

मुख्य अतिथि कवि कथाकार राजेन्द्र जोशी ने कहा कि शारदा भारद्वाज ने साबित किया है कि भाषा किसी एक धर्म या सम्प्रदाय की नहीं होती है।भाषा सिर्फ बोलने वाले की होती है।शारदा भारद्वाज को उर्दू से खूब मुहब्बत है।इसलिए वो उर्दू में शायरी करती है।उनकी शायरी सांप्रदायिक सद्भाव और भाईचारे की प्रतीक है।
डा ज़िया उल हसन कादरी ने कहा कि शारदा भारद्वाज पिछले कई वर्षों से शेर कह रही है।वो अनेक विषयों पर लिखती हैं।सामाजिक सरोकार और सद्भावना उनके प्रिय विषय हैं।
असद अली असद ने विमोचित कृति पर पत्रवाचन करते हुए “शबनमी मंजर” के विभिन्न पक्षों की विवेचना की।
प्रमोद शर्मा ने शारदा भारद्वाज की उर्दू में लिखी सरस्वती वंदना को अद्वितीय बताया।
इस अवसर पर शारदा भारद्वाज ने विमोचित कृति में से वादिनी,वक्त,किताब,नया साल,बदलती फितरत, कृष्ण क्या हो तुम गर होती बे रंग दुनिया,मेरा शहर, ये चांद ये सूरज ये रंगीन सितारे सहित चुनिंदा रचनाएं पेश की जो खूब पसंद की गई।
कार्यक्रम में व्यंग्यकार बुलाकी शर्मा,रवि शुक्ल,रेणुका व्यास नीलम,मनीषा आर्य सोनी,अमर जुनूनी,इमदादुल्लाह बासित,अब्दुल शकूर सिसोदिया,नरसिंह बिनानी,कमल किशोर पारीक,विप्लव व्यास,बाबूलाल छंगाणी,मेवा सिंह,शेर मुहम्मद, ओम प्रकाश सारसावा सहित अनेक साहित्यकारों व साहित्य प्रेमियों ने शिकरत की।
शुरू में डॉ जगदीश दान बारहठ ने आगंतुकों का स्वागत किया जबकि शारदा भारद्वाज के पतिदेव रमेश भारद्वाज ने आभार माना।संचालन डॉ ज़िया उल हसन कादरी ने किया।



