क़ासिम बीकानेरी का रंगा ट्रस्ट एवं प्रज्ञालय संस्थान द्वारा सम्मान

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क़ासिम बीकानेरी साहित्य, कला एवं संस्कृति के लिए समर्पित हैं : रंगा

बीकानेर, 11जनवरी । प्रज्ञालय संस्थान एवं श्रीमती कमला लक्ष्मीनारायण रंगा ट्रस्ट द्वारा नगर के वरिष्ठ शाइर कहानीकार क़ासिम बीकानेरी के 44वें जन्म दिवस के अवसर पर प्रज्ञालय संस्थान और श्रीमती कमला लक्ष्मीनारायण रंगा ट्रस्ट द्वारा नत्थूसर गेट स्थित नालंदा पब्लिक सीनियर सैकंडरी स्कूल के सृजन सदन में क़ासिम बीकानेरी को सम्मानित किया गया ।सम्मान स्वरूप उन्हें माल्यार्पण, शॉल, श्रीफल, स्मृति चिन्ह एवं साहित्यिक पुस्तकें भेंट की गई ।
सम्मान समारोह की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ कवि कथाकार एवं राजस्थानी भाषा मान्यता आंदोलन के प्रवर्तक कमल रंगा ने कहा कि क़ासिम बीकानेरी पिछले ढाई दशक से हिंदी, उर्दू एवं राजस्थानी भाषा में साहित्य, कला एवं सांस्कृतिक क्षेत्र में समर्पित होकर कार्य कर रहे हैं । क़ासिम बीकानेरी उर्दू अदब के क्षेत्र में नवाचार करते रहते हैं | क़ासिम बीकानेरी साहित्य की अनेक विधाओं में बेहतरीन एवं उम्दा सृजन कर रहे हैं । क़ासिम बीकानेरी की अनेक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। आप न सिर्फ एक अच्छे रचनाकार हैं बल्कि एक अच्छे अनुवादक भी हैं । नगर के साहित्यिक आयोजनों में भी आप की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है ।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता संस्कृतिकर्मी डॉ. फ़ारुक़ चौहान ने क़ासिम बीकानेरी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर अपनी बात रखते हुए कहा कि क़ासिम बीकानेरी न सिर्फ अच्छे रचनाधर्मी हैं बल्कि निहायत ख़ुलूसो-मुहब्बत वाले नेक इंसान भी हैं ।आपकी रचनाओं में देशभक्ति का जज़्बा बख़ूबी नज़र आता है। आपने बीकानेर का नाम देश विदेश तक रोशन किया है। आपकी अनेक पुस्तकें प्रकाशित होने वाली हैं।
कार्यक्रम में अपने विचार पेश करते हुए कवि गिरिराज पारीक ने कहा कि प्रज्ञालय संस्थान एवं श्रीमती कमला लक्ष्मीनारायण रंगा ट्रस्ट ने नगर के होनहार शाइर कहानीकार क़ासिम बीकानेरी का सम्मान करके एक अनुकरणीय पहल की है जिसके लिए संस्था साधुवाद की पात्र है ।
आरंभ में शिक्षाविद् राजेश रंगा ने तमाम आगंतुकों का स्वागत करते हुए कहा कि संस्था निरंतर प्रतिभाओं को प्रोत्साहन देने हेतु साहित्य एवं कला के क्षेत्र में इसी तरह के कार्यक्रम आयोजित करती रहेगी ।आपने कहा कि क़ासिम बीकानेरी ने साहित्य के क्षेत्र में जितनी विधाओं में काम किया है उतनी विधाओं में बहुत कम रचनाकार सृजन कर पाते हैं ।कार्यक्रम में मौलाना अब्दुल वाहिद अशरफ़ी, मोहम्मद इस्हाक ग़ौरी, माजिद ख़ान ग़ौरी, हरि नारायण आचार्य, सय्यद अनवर अली सहित अनेक प्रबुद्धजन मौजूद थे । अंत में सभी का आभार राजेश रंगा ने ज्ञापित किया । कार्यक्रम में कोरोना गाइडलाइंस का पूर्णतया सख़्ती से पालन किया गया ।

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