टीईटी विवाद पर ABRSM का राष्ट्रव्यापी हल्ला बोल
टुडे राजस्थान न्यूज़ (अज़ीज़ भुट्टा )
टीईटी विवाद पर ABRSM का राष्ट्रव्यापी हल्ला बोल
2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के सेवा अधिकारों की रक्षा हेतु केंद्र सरकार से तत्काल विधायी हस्तक्षेप की मांग
बीकानेर, 18 जून। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (विद्यालय शिक्षा राजस्थान) के राष्ट्रव्यापी आंदोलन के तहत जिला बीकानेर द्वारा गुरुवार को जिला कलक्टर कार्यालय बीकानेर पर विशाल धरना-प्रदर्शन आयोजित कर प्रधानमंत्री एवं केंद्रीय शिक्षा मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया। जिलाध्यक्ष मोहनलाल भादू एवं जिलामंत्री नरेन्द्र आचार्य के नेतृत्व में जिला कलक्टर को ज्ञापन दिया गया।
धरने को संबोधित करते हुए प्रदेश सचिव रवि आचार्य ने कहा कि शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) से संबंधित माननीय सर्वोच्च न्यायालय के 29 मई 2026 के निर्णय के बाद देशभर के लाखों शिक्षकों में भविष्य को लेकर चिंता, असुरक्षा एवं असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई है। ऐसे में केंद्र सरकार को संवेदनशीलता दिखाते हुए तत्काल विधायी एवं नीतिगत हस्तक्षेप कर वर्ष 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के सेवा अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि 23 अगस्त 2010 को राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) द्वारा टीईटी को न्यूनतम अर्हता के रूप में अधिसूचित किया गया था। इससे पूर्व विभिन्न राज्यों में नियुक्त लाखों शिक्षकों की नियुक्तियां तत्कालीन नियमों, पात्रता मानदंडों एवं चयन प्रक्रियाओं के अनुसार विधिवत रूप से हुई थीं। ऐसे शिक्षकों पर बाद में लागू किए गए मानदंडों को पूर्व प्रभाव से लागू करना प्राकृतिक न्याय, समानता एवं विधिक निश्चितता के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है।
प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य ओमप्रकाश बिश्नोई ने कहा कि भारतीय विधिक व्यवस्था का स्थापित सिद्धांत है कि कोई भी नियम सामान्यतः उसके लागू होने की तिथि से प्रभावी होता है। इसलिए पूर्व में वैध रूप से नियुक्त शिक्षकों की सेवाओं और अर्जित अधिकारों को प्रभावित नहीं किया जाना चाहिए। दशकों से सेवा दे रहे शिक्षकों के अनुभव, कार्यकुशलता एवं योगदान को देखते हुए उनके हितों की रक्षा करना सरकार की नैतिक एवं संवैधानिक जिम्मेदारी है।
प्रदेश सचिव श्रीमती चन्द्रकला ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों के कारण लाखों शिक्षकों एवं उनके परिवारों में असुरक्षा की भावना व्याप्त है। यदि इस विषय का शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो इसका प्रभाव केवल शिक्षकों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि विद्यालयी शिक्षा व्यवस्था की स्थिरता, विद्यार्थियों के हितों तथा प्रशासनिक व्यवस्था पर भी पड़ेगा। इसलिए यह विषय केवल सेवा हित का नहीं बल्कि राष्ट्रीय शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।
जिलाध्यक्ष मोहनलाल भादू ने कहा कि न्यायपालिका के निर्णय का सम्मान करना सभी का संवैधानिक दायित्व है, किन्तु जनहित में आवश्यक नीतिगत एवं विधायी समाधान उपलब्ध कराना संसद एवं केंद्र सरकार का अधिकार एवं दायित्व है। सरकार विशेष प्रावधान अथवा विधायी संशोधन के माध्यम से प्रभावित शिक्षकों को स्थायी राहत प्रदान कर सकती है।

महासंघ की प्रमुख मांगें
- 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से स्थायी छूट
23 अगस्त 2010 से पूर्व नियुक्त सभी शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से स्थायी रूप से मुक्त किया जाए, क्योंकि उनकी नियुक्तियां तत्कालीन नियमों के अनुरूप हुई थीं। - सेवा, वरिष्ठता एवं पदोन्नति सहित सभी अधिकारों का संरक्षण
वर्षों से कार्यरत शिक्षकों की सेवा, वरिष्ठता, पदोन्नति, वेतन निर्धारण एवं अन्य सभी सेवा लाभों को पूर्ण सुरक्षा प्रदान की जाए। - संसद में आवश्यक विधायी संशोधन
यदि आवश्यक हो तो संसद में विशेष प्रावधान या संशोधन लाकर वर्ष 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को स्थायी कानूनी संरक्षण प्रदान किया जाए। - राज्यों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश
देशभर में व्याप्त भ्रम एवं असमंजस को समाप्त करने के लिए केंद्र सरकार सभी राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करे। - पूर्व प्रभाव से पात्रता मानदंड लागू करने पर पुनर्विचार
योग्यता एवं पात्रता मानदंडों को पूर्व प्रभाव से लागू करने की अवधारणा पर न्याय, समानता एवं विधिक निश्चितता के आधार पर पुनर्विचार किया जाए। - शिक्षा व्यवस्था की स्थिरता और शिक्षकों के मनोबल की रक्षा
शिक्षकों के भविष्य को अनिश्चितता में डालना शिक्षा व्यवस्था एवं विद्यार्थियों के हितों के लिए भी घातक है। सरकार शीघ्र समाधान प्रस्तुत करे। - राष्ट्र निर्माण में योगदान देने वाले शिक्षकों के साथ न्याय
वर्षों से शिक्षा एवं राष्ट्र निर्माण में योगदान दे रहे शिक्षकों के साथ न्याय सुनिश्चित किया जाए। यह केवल सेवा हित नहीं बल्कि राष्ट्रहित का विषय है।
धरना स्थल पर गूंजे शिक्षक एकता के नारे
धरने और प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने जोरदार नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को बुलंद किया।
“टीईटी से शिक्षक को मुक्त करो”, “शिक्षक का सम्मान करो”, “अनुभव को मान्यता दो”, “टीईटी की नहीं अनिवार्यता”, “शिक्षा बचाओ–शिक्षक बचाओ”, “टीईटी से मुक्ति दिलाओ” जैसे नारों से पूरा कलक्टर परिसर गुंजायमान हो उठा।
धरने के बाद शिक्षक शांतिपूर्ण एवं अनुशासित ढंग से जिला कलक्टर कार्यालय पहुंचे और प्रदर्शन किया। टीईटी विवाद के कारण नौकरी पर मंडरा रहे संकट को लेकर शिक्षकों में भारी आक्रोश देखने को मिला।
अंत में जिलामंत्री नरेन्द्र आचार्य ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वर्ष 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के सेवा अधिकारों, वरिष्ठता, पदोन्नति एवं अन्य वैधानिक लाभों की रक्षा हेतु आवश्यक विधायी, नीतिगत एवं प्रशासनिक कदम तत्काल उठाए जाएं, ताकि लाखों शिक्षकों एवं उनके परिवारों का भविष्य सुरक्षित रह सके।
कार्यक्रम में प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य ओमप्रकाश बिश्नोई, जिलाध्यक्ष मोहनलाल भादू, जिलामंत्री नरेन्द्र आचार्य, प्रदेश सचिव श्रीमती चन्द्रकला, प्रदेश सचिव रवि आचार्य, महेश छीपा, जगदीश मंडा, अनिल सोनी, महावीर धतरवाल, पूनमचंद गोदारा, मीरा वर्मा, रचना गुप्ता, पवन शर्मा, भेरूदान सारण, विकास पंवार, सुमन ओझा, तेजस्विनी आचार्य, अलसीराम विश्नोई, मोनिका गौड़, नीलम सक्सेना सहित बड़ी संख्या में शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित रहे।




