ऑर्थो बायोलॉजिकल आधुनिक तकनीक से क्रांतिकारी परिवर्तन- डॉ कपूर

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टुडे राजस्थान न्यूज़ ( अज़ीज़ भुट्टा )

बीकानेर,23 जून। चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में तकनीक और शोध में पिछले कुछ दशकों में क्रांतिकारी परिवर्तन किए हैं हड्डी रोग के क्षेत्र में ऑर्थो बायोलॉजिकल एक ऐसे ही आधुनिक तकनीक के रूप में ऊभरी है जिसने उपचार के पारंपरिक तरीकों को पूरी तरह से बदल दिया है यह न केवल हड्डियों और जोड़ों की समस्याओं के समाधान में सहायक है बल्कि शरीर की अपनी प्राकृतिक उपचार क्षमता का उपयोग करके रिकवरी की प्रक्रिया को तेज करती है।ऑर्थोबायोलॉजिक्स वे जैविक पदार्थ है जिनका उपयोग हड्डियों मांसपेशियों टेंडन और लिंगममेट की चोटों को तेजी से ओठीक करने के लिए किया जाता है ये पदार्थ शरीर के प्राकृतिक ऊतकों से प्राप्त किए जाते हैं सरल शब्दों में कहे तो यह तकनीक शरीर के स्वस्थ सेल का उपयोग करके क्षतिग्रस्त हिस्से को पुनर्जीवित करने की प्रक्रिया है इसमें रोगी के ही रक्त को लेकर उसे सेंट्रीफ्यूज किया जाता है जिससे प्लेट्स की सांद्रता बढ़ जाती है इसे चोटिल स्थान पर इंजेक्ट किया जाता है ताकि पुस्तकों की मरम्मत तेजी से हो सके स्टेम सेल्स शरीर की वह कोशिकाएं है जो किसी भी अन्य कोशिका का रूप ले सकती है इन्हें आमतौर पर बोन मैरो या फट टिशु से लिया जाता है कई मामलों में जहां पहले सर्जरी अनिवार्य थी अब ऑर्थोबायोलॉजिक्स के माध्यम से बिना चीर फाड़ के उपचार संभव हो पा रहा है चूंकि इसमें मरीज के अपने सेल्स का उपयोग होता है इसलिए एलर्जी या बाहरी संक्रमण का खतरा ना के बराबर होता है।

ओस्टियोआर्थराइट्स गठिया और टेनिस एल्बो जैसी पुरानी समस्याओं में यह तकनीक अत्यधिक प्रभावी सिद्ध हुई है एथलीट और खिलाड़ियों के लिए यह वरदान है क्योंकि इसमें लिगामेंट की छोटे बहुत जल्दी ठीक होती है यद्यपि ऑर्थोबायोलॉजिक्स एक आशा जनक तकनीक है लेकिन इसकी लागत और हर ब्रिज पर इसके अलग-अलग प्रभाव अभी भी शोध का विषय है भारत जैसे देश में इसकी उपलब्धता और जागरूकता बढ़ाना एक बड़ी चुनौती है भविष्य में जैसे-जैसे रीजेनरेटिव मेडिसिन का विकास होगा आर्थिक बायोलॉजिक्स हड्डी रोग चिकित्सा का मुख्य आधार बन जाएगा ऑर्थो बायोलॉजी में हड्डी रोग विज्ञान में एक नया आयाम स्थापित किया है यह इलाज से आगे बढ़कर पुनर्जीवन की अवधारणा पर कार्य करता है आधुनिक जीवन शैली के कारण बढ़ते जोड़ों के दर्द और खेलकूद की चोटों के लिए यह तकनीक एक सुरक्षित और प्रभावी समाधान पेश करती है आने वाले समय में यह चिकित्सा पद्धति स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में मिल का पत्थर साबित होगी बीकानेर के पीबीएम अस्पताल ट्रॉमा सेंटर विभाग में संचारित हो रही यह प्रदेश की प्रथम OBRC मैं मरीजों पर शोध कार्य एवं इस पद्धति द्वारा इलाज से बहुत क्रांतिकारी लाभ हो रहा है ।

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