“बा वफ़ा सज्दे में है, हुस्ने वफ़ा सज्दे में है” आल राजस्थान तरही मुशायरा का हुआ आयोजन
टुडे राजस्थान न्यूज़ (अज़ीज़ भुट्टा )
बीकानेर,08 जुलाई। शहीदाने -कर्बला अकादमी की तरफ से मस्जिद मोहल्ला कुचीलपुरा में हज़रत इमाम हुसैन की याद में आल राजस्थान तरही मुशायरा का आयोजन किया गया।
“बा वफ़ा सज्दे में है, हुस्ने वफ़ा सज्दे में है” मिसर ए तरह पर आधारित मुशायरा देर रात तक चला। इसमें चुरू,फतेहपुर और जोधपुर से आमंत्रित शायरों के साथ स्थानीय शायरों ने भी रंग जमा दिया।
फतेहपुर शेखावाटी के शायर गाजी फतेहपुरी ने “नाजबरदारी का ये अंदाज भी देखे कोई/पुश्त पर शब्बीर है,खैरुलवरा सज्दे में है” सुना कर हज़रत इमाम हुसैन की महिमा बयान की।
जोधपुर के डॉ निसार राही ने “वक्त जब थम ही गया तो क्या अज़ल और क्या अबद/इब्तिदा सजदे में है और इन्तहा सजदे में है” सुना कर वाह वाही लूटी।
संयोजक जाकिर अदीब ने “फातिमा का लाल क्या पेशे खुदा सजदे में है/जिसको कहिए बंदगी इन्तहा,सजदे में है” सुनाया तो सभी सामयीन ने बार बार पढ़ने की फरमाइश की।

डॉ ज़िया उल हसन कादरी ने “ये जमीनो- आसमां, ये चांद – तारे, ये हवा/क्या बताएं कर्बला में क्या से क्या सजदे में है” सुना कर सजदे और इबादत का महत्व रेखांकित किया।बुनियाद हुसैन जहीन का तरही सलाम “आज आशूरा है और इब्ने – अली हैं तिशना लब/आज तो पानी सभी दरियाओ का सजदे में है”,चूरू के अब्दुल मन्नान मजहर चूरुवी ने “अहले हक़ ता-हश्र मज़हर जिससे होंगे मुस्तफीद/लश्करे इस्लाम का वो सूरमा सज्दे में है” और इदरीस राज चूरुवी ने ” कश्ती-ए-इस्लाम को साहिल पे लाने के लिए/किस अदा से देखिए इक नाख़ुदा सज्दे में है” सुना कर महफिल को रूहानियत से भर दिया।
इस अवसर असद अली असद,इमदाद उल्लाह बासित,अब्दुल जब्बार जज़्बी,बरकात वारसी,अब्दुल शकूर सिसोदिया,मुहम्मद यासीन,मोइनुद्दीन जामी,महबूब देशनोकवी,मुहम्मद इशाक गौरी शफ़क़,मुहम्मद यासीन,सालिक इरम और अमर जुनूनी ने भी अपने तरही कलाम के माध्यम से हज़रत इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों को खिराजे -अकीदत पेश किया।
प्रारंभ मे संस्था के सचिव भंवर अली सर्वा ने आगंतुकों का स्वागत किया।अंत में संस्था अध्यक्ष हाजी बशीर खां सर्वा ने सभी का आभार माना।संचालन जाकिर अदीब ने किया।



