जैन संस्कार विधि से किया मासखमण तप का पारणा
टुडे राजस्थान न्यूज़ ( अज़ीज़ भुट्टा )
“जैन संस्कार विधि” से मासखमण तप का पारणा
28 दिनों तक लगातार निराहार रहना दृढ मनोबल और अटूट ईच्छा शक्ति का विहंगम उदाहरण
बीकानेर 24 अगस्त। “गंगाशहर नई लाईन निवासी श्रद्धालु सुश्राविका श्रीमति अनिता नाहटा धर्मपत्नि राजेन्द्र नाहटा ने लगातार 28 दिन तक निराहार रहकर दृढ मनोबल, रसनेंद्रीय विजय और अटूट ईच्छा शक्ति का परिचय दिया है.. वर्तमान समय मे जहां कुछ देर के लिए भी भूखा रहना मुश्किल प्रतीत होता है वहां अगर कोई एक माह तक यानि लगातार 28 दिन निराहार रहे यह बहुत बड़ी बात होती है. बिना खाये पिए रहना असंभव लगता है लेकिन जैन धर्म मे तपस्या को आत्मशुद्धि का महान साधन बताया गया है. भव भव से संचित कर्मों को तोड़ने का तप एक महान उपाय है।
उपरोक्त विचार जैन संस्कार विधि के “श्री संस्कारक” धर्मेन्द्र डाकलिया ने जैन संस्कार विधि से श्रीमति अनिता नाहटा का पारणा करवाते हुए उपस्थित जनों से यह बात कहीं।

सम्पूर्ण विधि विधान और मांगलिक मन्त्रोंचार से तप संपूर्ति अनुष्ठान को जैन संस्कार विधि से संपादित करवाते हुए धर्मेन्द्र डाकलिया ने जैन संस्कार विधि को गुरुदेव श्री तुलसी का एक महान अवदान बतलाया और बिना किसी आडम्बर और हिंसा के अल्पीकरण को ध्यान मे रखते हुए इस महनीय विधि को जन जन के लिए जरुरी बताया।
सहयोगी संस्कारक देवेंद्र डागा और विपिन बोथरा ने मंगल भावना यन्त्र और तपस्वी बहन के लिए पारने के उपरांत करणीय और ध्यान रखने योग्य संकल्पों को ग्रहण करवाया।
रश्मि दसानी ने बताया कि तपस्विनी अनिता ने इन 28 दिनों मे सिर्फ सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच मे उबला हुआ जल का ही बहुत थोड़ी मात्र मे उपयोग किया है, रोशन और कीर्ति नाहटा ने बताया कि तपस्विनी अनिता ने इन 28 दिनों की मासखमण तपस्या मे नियमित रूप से सामायिक, जप, स्वाध्याय, धर्म ध्यान प्रवचन श्रवण आदि के द्वारा अपने भावों को निर्मल तम बनाये रखा।

शीलम और भावना ने बताया कि देव गुरु और धर्म के पुण्य प्रताप से, गंगाशहर मे विराजित साधु साध्वीयों की नियमित प्रेरणा, दर्शन लाभ और स्वयं की दृढ मनोबल ईच्छाशक्ति से आज यह इतना बड़ा तप सानंद संपन्न हुआ है।
संस्कारक धर्मेन्द्र डाकलिया, देवेंद्र डागा, विपिन बोथरा आदि ने विभिन्न जैन धार्मिक मन्त्रोंचार और आध्यात्मिक गीतिकों के संगान से यह जैन संस्कार विधि से तप संपूर्ति अनुष्ठान का आयोजन बहुत ही गरिमामय और उल्लासमय बना दिया.।
जैन संस्कार विधि के “श्री संस्कारक” धर्मेन्द्र डाकलिया ने उपस्थित जन समुदाय को जैन संस्कार विधि की पूरी और विस्तृत जानकारी करवाई.. और इतनी बड़ी तपस्या के उपलक्ष मे हर एक जन से कुछ ना कुछ छोटा बड़ा त्याग अपनी अनुकूकता और सुविधा से करने का निवेदन किया. नाहटा परिवार की तरफ से राजेन्द्र पारस नाहटा ने तप संपूर्ति अनुष्ठान का यह सुन्दर आयोजन जैन संस्कार विधि से आयोजित करवाने के लिए तीनों संस्कारकों का आभार प्रकट किया।



