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श्री जैन गर्ल्स कॉलेज में अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाया
बीकानेर, 08 सितम्बर। अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस के अवसर पर श्री जैन गर्ल्स कॉलेज की राष्ट्रीय सेवा योजना (रासेयो) इकाइयों के संयुक्त तत्वावधान में एक विचारोत्तेजक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्राओं को साक्षरता के महत्व, शिक्षा की व्यापक अवधारणा तथा वर्तमान समय में डिजिटल साक्षरता की आवश्यकता के प्रति जागरूक करना था।


कार्यक्रम के प्रमुख वक्ता एवं शिक्षाविद् डॉ. राजेंद्र जोशी ने अपने उद्बोधन में साक्षरता और शिक्षा के बीच के अंतर को स्पष्ट करते हुए कहा कि साक्षरता जहां व्यक्ति को पढ़ने-लिखने और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक बनाती है, वहीं शिक्षा व्यक्ति के व्यक्तित्व, चिंतन, विवेक एवं जीवन-दृष्टि का व्यापक विकास करती है। उन्होंने शिक्षा के विभिन्न स्वरूपों—औपचारिक एवं अनौपचारिक शिक्षा—पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि शिक्षा किसी निश्चित आयु या डिग्री तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवनपर्यंत चलने वाली प्रक्रिया है।

डॉ. जोशी ने कहा कि वर्तमान समय में डिग्री को प्रायः रोजगार प्राप्त करने के औपचारिक माध्यम के रूप में देखा जाता है, जबकि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य व्यक्ति को ज्ञानवान, विवेकशील, संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक बनाना है। उन्होंने प्राचीन भारतीय गुरुकुल शिक्षा पद्धति की विशेषताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय शिक्षा में ज्ञान के साथ संस्कार, अनुशासन, नैतिकता, आत्मनिर्भरता एवं जीवन-मूल्यों को भी विशेष महत्व दिया जाता था। उन्होंने वर्तमान डिजिटल युग में डिजिटल साक्षरता को भी समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता बताते हुए छात्राओं से तकनीक का ज्ञान अर्जित करने के साथ-साथ उसका विवेकपूर्ण एवं जिम्मेदार उपयोग करने का आह्वान किया।

रासेयो प्रभारी डॉ. पल्लवी चौहान ने स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद देश में साक्षरता के क्षेत्र में हुए उल्लेखनीय बदलावों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा समय-समय पर चलाए गए विभिन्न साक्षरता अभियानों एवं शैक्षिक योजनाओं के परिणामस्वरूप देश में साक्षरता दर में निरंतर वृद्धि हुई है। उन्होंने छात्राओं को साक्षरता को केवल व्यक्तिगत विकास तक सीमित न रखते हुए समाज के वंचित एवं जरूरतमंद वर्गों तक शिक्षा और जागरूकता का संदेश पहुंचाने के लिए प्रेरित किया।
रासेयो प्रभारी विशाल सोलंकी ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस हमें यह संकल्प लेने का अवसर प्रदान करता है कि समाज का कोई भी व्यक्ति शिक्षा और ज्ञान से वंचित न रहे। उन्होंने कहा कि आज के दौर में केवल अक्षर ज्ञान ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि व्यक्ति का डिजिटल, वित्तीय, सामाजिक एवं विधिक रूप से साक्षर होना भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि युवा वर्ग इस दिशा में जागरूकता फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
इस अवसर पर रासेयो स्वयंसेविकाओं रोनक, कांता, ममता एवं संध्या देवड़ा ने भी साक्षरता एवं शिक्षा के महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए। छात्राओं ने अपने वक्तव्यों में साक्षरता को आत्मनिर्भरता, सामाजिक परिवर्तन और राष्ट्र निर्माण का आधार बताया।
संगोष्ठी के पश्चात रासेयो स्वयंसेविकाओं द्वारा महाविद्यालय परिसर में श्रमदान किया गया। स्वयंसेविकाओं ने परिसर की स्वच्छता एवं साफ-सफाई में सक्रिय सहभागिता निभाते हुए श्रम की गरिमा और सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश दिया।
कार्यक्रम के अंत में साक्षरता को जन-जन तक पहुंचाने तथा शिक्षा के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का संकल्प लिया गया।


