वेटरनरी विश्वविद्यालय के अधिस्वीकरण के लिए आई.सी.ए.आर. टीम का विश्वविद्यालय में दौरा

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बीकानेर 3 दिसम्बर। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् की चार सदस्य पीयर रिव्यू टीम ने अधिस्वीकरण हेतु विश्वविद्यालय के संघटक महाविद्यालय पी.जी.आई.वी.ई.आर. जयपुर एवं वेटरनरी महाविद्यालय, नवानियां, उदयपुर का गुरुवार को दौरा एवं निरीक्षण किया।

असम कृषि विश्वविद्यालय, जोरहट के पूर्व कुलपति डॉ. के.एम. बजरबरूआ के नेतृत्व में पहुंची टीम में डॉ. एम.के. अग्निहोत्री, वरिष्ठ वैज्ञानिक, शिक्षा विभाग, आई.सी.ए.आर., डॉ. एम.के. नारायनन, निदेशक उद्यमिता, पशुचिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, केरल डॉ. मनदीप शर्मा, अधिष्ठाता वेटरनरी महाविद्यालय, हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय, पालमपुर ने शुक्रवार को वेटरनरी कॉलेज, बीकानेर के पशुचिकित्सा संकुल का दौरा एवं वहां उपलब्ध चिकित्सकीय उपकरणों, पशु रोग निदान सेवाएँ, सी.टी.स्केन, छोटे एवं बड़े पशुओं के ऑपरेशन थियेटरो एवं पशुओं के इलाज की प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी ली।

पी.आर.टी. दल ने विभिन्न विभागों, पुस्तकालय, स्टेट प्लान केन्द्रों, हॉस्टल, लाइब्रेरी, पशुधन फार्म इत्यादि का दौरा कर उपलब्ध उपकरणों, शैक्षणिक एवं शोध सुविधाओं, उपलब्ध मानव संसाधन की जानकारी ली। टीम सदस्यो ने प्रसार शिक्षा निदेशालय, अनुसंधान निदेशालय, आई.यू.एम.एस. में भ्रमण कर विश्वविद्यालय में संचालित विभिन्न प्रसार, शोध गतिविधियों, योजनाओं एवं प्रशासनिक प्रक्रियाओं की जानकारी प्राप्त की। इससे पहले कुलपति प्रो. सतीश के गर्ग ने पी.आर.टी. दल को विश्वविद्यालय द्वारा संचालित विभिन्न शैक्षणिक, शोध एवं प्रसार गतिविधियों, उपलब्ध मानव संसाधन एवं विद्यार्थियों व फैकल्टी विकास हेतु विभिन्न सुविधाओं एवं संसाधनों का विस्तृत प्रस्तुतीकरण किया।

अधिष्ठाता प्रो. आर.के सिंह ने महाविद्यालय में संचालित विभिन्न गतिविधियों एवं उपलब्ध संसाधनों के बारे में आई.सी.ए.आर. के दल को जानकारी उपलब्ध कराई। इस दौरान विश्वविद्यालय के कुलसचिव अजितसिंह राजावत, वित्त नियंत्रक प्रतापसिंह पूनिया एवं सभी डीन-डारेक्टरस एवं विभागाध्यक्ष मौजूद थे। टीम के सदस्यों ने शैक्षणिक एवं अशैक्षणिक कर्मचारियों, विद्यार्थियों से संवाद किया। गौरतलब है कि सदस्यीय दल के निरीक्षण एवं मूल्यांकन के आधार पर तैयार रिपोर्ट के आधार पर भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् द्वारा विश्वविद्यालय का पांच वर्षों के लिए अधिस्वीकरण किया जायेगा, जिससे विश्वविद्यालय को वित्तीय सहायता एवं विभिन्न योजनाओं को मंजूरी प्रदान की जा सकेगी।

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