राजस्थानी भाषा हमारी सांस्कृतिक धरोहर है-शरद केवळिया

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बीकानेर 20 फरवरी। मातृभाषा राजस्थानी हमारी पहचान तो है ही साथ ही हमारी सांस्कृतिक धरोहर है, जिसके प्रति नई पीढी सकारात्मक सोच एवं समर्पित भाव से अपनी रचनात्मक भूमिका का निवर्हन करें, यह उद्गार आज प्रातः नालन्दा परिसर में आयोजित प्रज्ञालय संस्थान एवं राजस्थानी युवा लेखक संघ द्वारा विश्व मातृभाषा दिवस के अवसर पर तीन दिवसीय समारोह के प्रथम दिवस पर राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी के सचिव शरद केवळिया ने बतौर मुख्य अतिथि व्यक्त किए।
शरद केवळिया ने आज सैकड़ों बालक-बालिकाओं को ‘भाषासंकल्प’ कार्यक्रम के तहत मातृभाषा राजस्थानी के संदर्भ में संकल्प दिलवाया।
कार्यक्रम के प्रभारी संस्कृतिकर्मी हरिनारायण आचार्य ने प्रारंभ में कहा कि युवा पीढ़ी को अपनी मातृभाषा के लिए हर स्तर पर सहयोग करना चाहिए और उसे ज्यादा से ज्यादा अपने जीवन व्यवहार में अपनाना चाहिए।
भाषा संकल्प के उपरांत सृजन सदन में मातृभाषा राजस्थानी पर केन्द्रित चर्चा की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ कवि कथाकार कमल रंगा ने कहा कि मातृभाषा व्यक्ति के संस्कारों की परिचायक तो है ही, साथ ही व्यक्ति के सम्प्रेषण एवं अभिव्यक्ति का सार्थक माध्यम भी होती है।
चर्चा का विषय प्रवर्तन करते हुए युवा शाायर कासिम बीकानेरी ने कहा कि मातृभाषा राजस्थानी मानवीय चेतना का सशक्त माध्यम है। वहीं कवि गीरिराज पारीक ने कहा कि राजस्थानी करोडों लोगों के कंठों की वाणी है। भाषा चर्चा में अपनी बात रखते हुए युवा शिक्षाविद् राजेश रंगा ने कहा कि मातृभाषा राजस्थानी जीवन में ज्ञान, सफलता, एवं लक्ष्य प्राप्ति का सशक्त मार्ग है।
इसी संदर्भ में अपनी बात रखते हुए किशोर जोशी, सीमा पालीवाल, भवानी सिंह, अशोक शर्मा आदि ने मातृभाषा राजस्थानी के महत्व को रेखांकित किया। चर्चा का संचालन करते हुए डॉ फारूक चौहान ने कहा कि मातृभाषा हमारे भावों को स्पष्ट करती है।

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