हिंदी – उर्दू के रचनाकारों ने बसंत पर कलाम सुना कर किया मंत्रमुग्ध

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बीकानेर,06फरवरी। पर्यटन लेखक संघ-महफिले अदब की साप्ताहिक काव्य गोष्ठी की 514 वीं कड़ी में रविवार को हिंदी और उर्दू के रचनाकारों ने वसन्त पर कलाम सुनाकर दाद लूटी।
ऑनलाइन कार्यक्रम में वरिष्ठ शाइर ज़ाकिर अदीब ने वसन्त की शान बयान की-
ज़ेहन में जो रहेंगी ताज़ा “अदीब”
वो बहारों का सिलसिला है वसन्त
आयोजक डॉ ज़िया उल हसन क़ादरी ने फूलों पर ग़ज़ल पेश की-
क्यूं ना हो एतबार फूलों का
दिल पे है इख्तियार फूलों का
शारदा भारद्वाज ने उर्दू में सरस्वती वंदना प्रस्तुत की-
हे वीणा वादिनी,हे हंस वाहिनी
साज़ दे और ताब दे मेरे गीतों को नया राग दे
कवयित्री कृष्णा वर्मा ने “देखो बसन्त ऋतु आई है”,नीतू जोशी ने “हे माँ सरस्वती तुझको नमन”,युवा कवि सोनू लोहमरोड ने “घर में उठी दीवारें”,कवयित्री मधुरिमा सिंह ने “बंसती बयार”,जुगलकिशोर पुरोहित ने “आएगा बसन्त मानव जीवन में”,भरत कुमार खुड़िया ने “मुझे जलाकर घर जाकर लोगों ने”,नर्सिंग ऑफिसर मेवा सिंह ने “हे माँ सरस्वती संसार वासियों को इतनी शक्ति देना” और डॉ नरसिंह बिनानी ने “इस दिन का है पावन त्योहार/कहलाता है बसन्त पंचमी”सुना कर काव्य के गुलिस्तान में वासन्तिक पुष्प खिला दिए।
इस अवसर पर प्रो टी के जैन,डॉ ओमप्रकाश स्वामी और गोविंद शर्मा तन्हा ने रचनाकारों की भरपूर सराहना की।

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