व्यंग्य में ना काहू से दोस्ती ना काहू से बैर का भाव जरूरी -भवानीशंकर व्यास ‘विनोद’

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बीकानेर, 20 मार्च। शब्दरंग साहित्य एवं कला संस्थान के तत्वावधान में सुप्रसिद्ध व्यंग्यकार डॉ.अजय जोशी के तीसरे व्यंग्य संग्रह ‘पत्नीस्यमूडम’ का लोकार्पण रविवार को पवनपुरी में किया गया। लोकार्पण समारोह की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार एवं हास्य कवि भवानीशंकर व्यास “विनोद” ने की तथा लोकार्पण समारोह के मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार कवि – कथाकार राजेन्द्र जोशी थें ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए ख्यातनाम हास्य-व्यंग्य कवि और साहित्यकार श्री भवानी शंकर व्यास ‘विनोद’ ने कहा कि मध्यकाल के साहित्य में जब भी और जहाँ भी व्यंग्य और वक्रोक्ति का प्रसंग आता है तो कबीर का नाम स्वतः ही आ जाता है।कबीर की रचनाओं में ‘ना काहू से दोस्ती ना काहू से बैर’ की प्रमुखता रहती है।यह व्यंग्य का बुनियादी घटक है। उन्होंने कहा कि डॉ.अजय जोशी के व्यंग्य लेखन में भी यह बात सपष्ट झलकती है।उनके हाल ही में प्रकाशित पत्नीस्यमूडम के व्यंग्य पति पत्नी संबंधों से जुड़ी हास्य व्यंग्य व्यंग्य रचनाएँ हैं इनमें व्यंग्यकार खुद पर भी व्यंग्य करने से नहीं चूकता।
लोकार्पण समारोह के मुख्य अतिथि कवि-कथाकार राजेन्द्र जोशी ने कहा कि डॉ.अजय जोशी के व्यंग्यों की भाषा सरल, सहज और सम्प्रेषणीय है। जोशी ने कहा कि डॉ जोशी की व्यंग्य रचनाएँ आम आदमी की पीड़ा को समाज के सामने प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करती है , उन्होंने कहा कि साहित्य में अब व्यंग्य विधा ने अपना अलायदा स्थान बना लिया है, जोशी ने कहा कि पाठकों को डॉ अजय जोशी की व्यंग्य रचनाएँ भीतर तक प्रभावित करती है । उन्होंने डॉ जोशी की व्यंग्य यात्रा की महत्वपूर्ण जानकारी उपस्थित लोगों के सम्मुख रखी।
विशिष्ट अतिथि हिंदी की प्रोफेसर कवयित्री-कथाकार डॉ.सुमन बिस्सा ने कहा कि डॉ. अजय जोशी के व्यंग्य लेखन की भाषा में चमक, चटक, चुटीलापन ,चुम्बकीयता एवं लालित्य है जो व्यंग्य को पठनीय बनाते हैं।इस अवसर पर कार्यक्रम संयोजक कवि- कथाकार राजराम स्वर्णकार ने कहा कि डॉ.जोशी के व्यंग्यों के शीर्षक आकर्षक और कोतुहल भरे हैं जो पाठकों को सहज ही आकर्षित कर लेते हैं।इस अवसर पर कृति के लेखक व्यंग्यकार डॉ. अजय जोशी ने कहा कि पत्नीस्यमूडम के व्यंग्य पति पत्नी संबंधों से जुड़े शोध निष्कर्षों और समाचार पत्रों में प्रकाशित अटपटे समाचार है जिनसे सहज ही हास्य व्यंग्य की स्थिति उत्पन्न हो जाती है और चटपटी रचना बन जाती है।
कार्यक्रम में कथाकार अशफाक कादरी ने डॉ.अजय जोशी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए उनके रचनाकर्म पर चर्चा की।इस अवसर पर हिंदी और राजस्थानी की वरिष्ठ रचनाकार श्रीमती आनंद कौर व्यास,प्रेरणा प्रतिष्ठान के अध्यक्ष प्रेमनारायण व्यास,रंगकर्मी बी॰एल॰नवीन सहित कई प्रबुद्ध जन उपस्थित थे।कार्यक्रम का संचालन अशफाक कादरी ने किया और आभार ज्ञापन गिरिराज पारीक ने किया।

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