मित एवं परिमित हो हमारी वाणी – आचार्य महाश्रमण

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शांतिदूत के दर्शनार्थ पहुंचे केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल

आचार्यप्रवर ने दी दोष रहित भाषा बोलने की प्रेरणा

गाढवाला, बीकानेर, 31 मई। अपने आध्यात्मिक प्रवचनों से जनमानस का अज्ञान रूपी अंधकार हरने वाले संत शिरोमणि युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी वर्तमान में झुलसाने वाली भीषण गर्मी में भी जन कल्याण के लिए राजस्थान के बीकानेर जिले में अनवरत गतिमान है। आज प्रातः आचार्यश्री ने उदासर तेरापंथ भवन से मंगल विहार किया।

मार्ग में स्थान-स्थान पर श्रद्धालु श्रावक-श्राविकाओं को आशीर्वाद प्रदान करते हुए पूज्यप्रवर गंतव्य की ओर गतिमान हुए। एक ओर जहां आकाश से सूरज तीव्र आतप बरसा रहा था ऐसे में भी ज्योतिचरण समत्व भाव से मंजिल की ओर अग्रसर थे। लगभग 13 किलोमीटर का विहार कर आचार्यश्री गाढ़वाला ग्राम के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में प्रवास हेतु पधारे।
मध्यान्ह में केन्द्रीय संस्कृति एवं संसदीय कार्य मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने शांतिदूत आचार्य श्री महाश्रमण जी के दर्शन किए। इस अवसर पर उन्होंने आचार्यश्री का अपने क्षेत्र बीकानेर में पधारने पर स्वागत किया।

प्रवचन में धर्मदेशना देते हुए युगप्रधान आचार्य श्री ने कहा हमारे जीवन में भाषा का बहुत महत्त्व है। भाषा हितकारिणी होती है तो वह कही- कही अहितकारिणी भी बन सकती है। वाणी एक ऐसा तत्व है जिसे अच्छे संबंधों को बिगाड़ा जा सकता है व बिगड़े संबंधों को सुधारा भी जा सकता। वाणी के तीन गुण है – मित बोलो, परिमित बोलो व निरर्थक मत बोलो। व्यक्ति वाणी का संयम रखे। दिनभर मौन तो नहीं कर सकता तो कम से कम संयमित भाषा बोले। भाषा दोष रहित भी होनी चाहिए। झूठ बोलना एवं कटु बोलना भाषा के दोष है।

आचार्यश्री ने आगे कहा की ऐसी वाणी नही कहनी चाहिए जो किसी को कष्टप्रद लगे, बुरी लगे। सच भी ऐसा बोलो जो अप्रिय न हो व किसी का अहित करने वाला न हो। पहले सोचो फिर बोलो, पहले तोलो फिर बोलो। वाणी में गुस्से का समावेश भी न हो। सच्चाई एवं मधुरता भाषा का आभूषण होती है। हमारी वाणी कल्याणकारिणी बने ऐसा प्रयास रहना चाहिए।

इस अवसर पर राजकीय माध्यमिक विद्यालय, गाढ़वाला के प्रधानाध्यापक श्री श्रवण गोदारा ने अपने विचार रखे। तेरापंथ महिला मंडल नोखा, मरोठी परिवार की बहनों ने गीत का संगान किया। अवधि, धनेश, धनवी धींग ने प्रस्तुति दी।

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