राजस्थानी युवा समिति के नेतृत्व में हजारों लोगों ने देखी फ़िल्म “लव यू म्हारी जान”
टुडे राजस्थान न्यूज़
बीकानेर 11 दिसंबर । ऐसे समय में जब बॉलीवुड की हिन्दी फिल्मों की चकाचोंध में राजस्थानी सिनेमा दर्शकों के लिए तरस रहा है और राजस्थानी भाषा की संवैधानिक मान्यता के लिए आजादी से पहले शुरु हुआ आंदोलन आज भी मान्यता के इंतजार में खड़ा है, राजस्थानी युवा समिति के संरक्षक श्री राजवीर सिंह चलकोई के नेतृत्व में राजस्थानी फिल्म “लव यू म्हारी जान” के पूरे के पूरे शौ बुक करके राजस्थानियों को अलग अलग- अलग शहर में भाषा और राजस्थानी फिल्मों के प्रति जागरूक किया जा रहा है |

जयपुर, जोधपुर के बाद आज बीकानेर के सूरज सिनेमा में राजस्थानी मूवी दिखाई गयी जिसमें हजारों की संख्या में लोग फिल्म देखने आए | फिल्म के दौरान राजस्थानी भाषा की संवैधानिक मान्यता की मांग के लिए नारे लगे| युवा समिति के बीकानेर संयोजक राम उपाध्याय ने बताया कि मूवी के सारे शौ बुक करने पीछे उद्देश्य राजस्थानी सिनेमा से दर्शकों को जोड़ना है ताकि टोलिवुड और बोलिवुड की तरह राजस्थान में भी क्षेत्रीय सिनेमा का क्रेज बढे ताकि राजस्थानी युवा भी कला के क्षेत्र में अवसर बना सकें | वहीं समिति के उपाध्यक्ष प्रवीण मकवाना ने कहा कि युवा समिति राजस्थान के हर कोने में हर राजस्थानी तक पहुंचकर राजस्थानी भाषा के लिए जागरूक कर रही है , इसके तहत नुक्कड़ कार्यक्रम, कॉलेज ,विश्वविद्यालय और स्कूलों में युवाओं को “हेलौ मायड़ भासा रौ’ केहत संपर्क किया जा रहा है |

राजस्थानी के कवि छैलू चारण ‘छैल’ ने कहा कि हर राजस्थानी को अपनी मातृभाषा राजस्थानी से प्रेम करना चाहिए |राजस्थानी भाषा को शीघ्र संवैधानिक मान्यता मिलनी चाहिए उससे पहले राजस्थान सरकार को इसे राजभाषा का दर्जा देकर मातृभाषा के कर्ज को चुकाकर अपना फर्ज अदा करें | इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए युवा समिति के प्रशांत जैन, मदन दान दासौड़ी,भरत सिंह दासौड़ी,अजय कंवर, राजेश चौधरी आदि ने कड़ी मेहनत कर मूवी देखने का आमंत्रण दिया | करणी मंदिर देशनोक निजी प्रन्यास अध्यक्ष श्री बादल सिंह देपावत ने राजस्थानी युवा समिति को भाषा के लिए हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया | डॉ. कुलदीप सिंह बीठू ने भी सपरिवार मूवी देखी |राजस्थानी युवा समिति का अगला ‘हेलौ मायड़ भासा रो ‘ कार्यक्रम उदयपुर में 18 दिसंबर को होगा|
इनका कहना है
राजस्थानी सिनेमा दर्शकों के लिए जूझ रहा है, कमाई के अभाव में निर्माता राजस्थानी फिल्मों पर पैसा लगाने से कतराते हैं | यहाँ तक कि थियेटर भी फिल्में प्रदर्शित करने से मना कर देते हैं | ऐसे में राजस्थानी युवा समिति की यह मुहिम राजस्थानी सिनेमा और राजस्थानी फिल्मों के लिए हनुमान की संजीवनी जैसा काम करेगा |

~ कश्मीरा , फिल्म की नायिका
जो सिनेमाघर राजस्थानी फिल्में प्रदर्शित करने से आनाकानी करते हैं उन पर राज्य सरकार को नियम बनाकर पाबंद करना चाहिए | राजस्थान में ही राजस्थानी फिल्मों के साथ दोगलापन होना राजस्थानी भाषा की तोहीन है |
~लक्षित झांझी , फिल्म के नायक
राजस्थानी युवा समिति राजस्थानी भाषा आंदोलन की कड़ी में एक नयी क्रांति है और इतिहास में क्रांतियों के परिणाम हमेशा दूरगामी रहे हैं | राजस्थानी युवा अब राजस्थानी को मान्यता दिलवाकर ही दम लेंगे |
~अरुण राजपुरोहित, पदाधिकारी राजस्थानी युवा सिमिति




