करते किस दर्जा हैं बच्चों से मुहब्बत मां बाप, ख़ुद पे ले लेते हैं बच्चों की मुसीबत मां बाप
टुडे राजस्थान न्यूज़ ( अज़ीज़ भुट्टा )
बीकानेर-18 जून। पर्यटन लेखक संघ-महफिले अदब की साप्ताहिक काव्य गोष्ठी में रविवार को होटल मरुधर हेरिटेज में शाइर इम्दादुल्लाह बासित ने पितृ दिवस के अवसर पर उक्त पंक्तियां सुना कर मां बाप का महत्व परिलक्षित किया।
डॉ जगदीशदान बारहठ के मुख्य आथित्य में आयोजित काव्य गोष्ठी में वरिष्ठ शाइर ज़ाकिर अदीब ने बाबूजी रदीफ़ से ग़ज़ल पेश कर पिता को याद किया।

है कम जो पेश करें जान का भी नज़राना
है हम पे आपका इतना उधार बाबूजी
आयोजक डॉ ज़िया उल हसन क़ादरी ने पिता का स्मरण करते हुए उन्हें फरिश्ता बताया-
मुझको कभी जो बाप का चेहरा दिखाई दे
ऐसा लगे है जैसे फरिश्ता दिखाई दे
इस अवसर पर असद अली असद, डॉ कृष्ण लाल बिश्नोई,शकूर बिकानवी,धर्मेंद्र राठौड़ धनंजय,डी एल एड स्टूडेंट नरसीराम और महेश सिंह बडगुजर ने भी कलाम सुनाकर वाह वाही लूटी।
सन्चालन डॉ ज़िया उल हसन क़ादरी ने किया।



