आई.एस.ओ.आई की कार्यशाला में दांतों की इम्पलान्टलोजी पर हुई गहन चर्चा का लाइव प्रदर्शन

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टुडे राजस्थान न्यूज़ (अज़ीज़ भुट्टा )
बीकानेर, 21 जनवरीं। इंटरनेशनल सोसायटी ऑफ इम्पालान्टलॉजी के बीकानेर स्टडी ग्रुप की ओर से रविवार को रानी बाजार औद्योगिक क्षेत्र के उद्योग भवन में दांतों की आधुनिक चिकित्सा से इम्प्लांट रोजी (प्रत्यारोपण) पर कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला मेंं बीकानेर, श्रीगंगानगर, नागौर, भरतपुर व जयपुर सहित प्रदेश के विभिन्न जिलां के लगभग 60 दंत चिकित्सकां ने हिस्सा लिया। इन चिकित्सकों को देश-विदेश मेंं ख्याति प्राप्त इम्पलान्लोजी विशेषज्ञ चिकित्सकों ने आधुनिक चिकित्सा पद्धति से दांतों का प्रत्यारोपण करने के तरीके की व्यवहारिक व प्रायोगिक जानकारी दी।


कार्यशाला आयोजन कमेटी की अध्यक्ष डॉ.उर्वशी बिनानी व सचिव डॉ.कुसुम ने बताया कि कार्यशाला के बाद सार्दुलगंज स्थित डॉ.बिहानी डेंटल क्लिनिक व इम्प्लांट सेंटर में प्रायोगिक सत्र आयोजित किया गया । जिसमें अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त जयपुर के दंत चिकित्सक डॉ. संकल्प मितल, डॉ. एच.एल.गुप्ता, डॉ.आलोक भारद्वाज, डॉ.धवल गोयल, डॉ.सतीश भारद्वाज व भरतपुर के डॉ. गोरव पाल सिंह, कमेटी के संरक्षक डॉ. विनोद बिहानी, ने चिकित्सकों की जिज्ञासाओं का दूर किया तथा कहा कि भारत मे विदेशों की तुलना में सस्ता व सुलभ इम्प्लांट रोजी की सुविधा है। चिकित्सक दंत चिकित्सा के क्षेत्र में हो रहे आधुनिक चिकित्सा का ज्ञान हासिल कर रोगियों का बेहतर ईलाज करें।


विभिन्न सत्रों में विशेष चिकित्सकों ने व्याख्यान में कहा कि वर्तमान में डेंटल इम्प्लांट सर्जरी और प्रोस्थेटिक डेंटिस्ट्री आधुनिक दंत चिकित्सा का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई है, इससे दांतों की क्षति के प्रभाव को समझने व प्रभावी समाधान मिलता है। विशेषज्ञ चिकित्सकों ने बताया कि मानव मुंह एक जटिल संरचना है, मुंह के प्रत्येक दांत व्यक्ति के स्वास्थ्य का प्रतीक है। एक दांत के नुकसान को एक शारीरिक अक्षमता का प्रतीक माना जाता है। डेंटल इम्प्लांट्स असली दांत की जगह में स्थानान्तरित करने के स्थाई आधार प्रदान करते है वहीं प्रोस्थेटिक दांतों को मजबूत व स्थिरता प्रदान करते है। इस प्रक्रिया में टाइटेनियम इम्पलांट को जबड़े में रखने के लिए सर्जिकल प्रक्रिया शामिल है जिसमें वे हड्डी में स्थापित किए जाते है। चिकित्सकों ने बताया कि प्रोस्थेटिक डेंटिस्ट्री व डेंटल प्रोस्थेसेस से दांतों की मजबूती व स्थायित्व के साथ चेहरे की निखार व बोलने की क्षमता में प्रभाव होता है।
कार्यशाला में हिस्सा लेने वाले विशेषज्ञ चिकित्सकों व उद्योगपति द्वारका प्रसाद पच्चीसिया का शॉल, पुष्पहार व स्मृति चिन्ह तथा साफा पहनाकर डॉ. विनोद बिहानी, डॉ.विशाल मलिक, डॉ.शशांक, डॉ.वीरेन्द्र सिंह, डॉ.राजकुमार पुरोहित, डॉ.रवि नाग, मनोज सनवाल, डॉ.पीयूष पारीक, डॉ.पुनीत कालरा, डॉ.जुनैद अहमद, डॉ. अम्बूझ गुप्ता व अन्नु मलिक ने सम्मानित किया।

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