पांच दिवसीय रंग आनंद समारोह का हुआ समापन

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टुडे राजस्थान न्यूज़ (अज़ीज़ भुट्टा )

पांच दिवसीय रंग आनंद समारोह का भव्य समापन
बाबा शेख चिल्ली में नकली बाबाओं पर प्रहार
बुलाकी भोजक को रंग आनंद अवार्ड अर्पित
“सरदार” का हुवा विमोचन
बीकानेर, 22 फ़रवरी। संकल्प नाट्य समिति, बीकानेर के तत्वावधान में स्वर्गीय शायर व रंगकर्मी आनंद वि आचार्य की स्मृति में टाउन हाल में चल रहे पांच दिवसीय राज्य स्तरीय नाट्य समारोह के अंतिम दिवस 21 फरवरी को यू .एस . अकेडमी की तरफ से रफी शबीर द्वारा लिखित व उत्तम सिंह द्वारा निर्देशित नाटक बाबा शेख चिल्ली फेस बुक वाले का प्रभावी मंचन किया गया। नाटक सीधे सीधे उन बाबाओं पर व्यंग्य करता है जो पाखंड के ज़रिये मासूम व भोली भाली जनता को ठग कर अपना उल्लू सीधा करते है।

हास्य परक घटनाओं के माध्यम से नाटक उन अपराधी प्रवृति के लोगो को भी बेनकाब करता है जो धर्म व मजहब के नाम पर लोगो के अन्धविश्वास का फायदा उठा कर उन्हे अपनी चालाकियों का शिकार बनाते है। इस तरह के बाबाओं के प्रति समाज को सचेत करते हुवे नाटक उन्हें अपने अंजाम तक पहुंचाने की पैरवी भी करता है। कुशल निर्देशन तथा कलाकारों में उत्तम सिंह, जय खत्री, नवेद भाटी, प्रिंयका आर्य, रवि राज भाटी, अनिल बॉंधडा, लोचन पारीक, रोहित वाल्मीकि, गीतिका वालिया, फणीश्वर खत्री व विराज कुमार के प्रभावी अभिनय किया। संगीत प्रभाव उदित नारायण पारीक व प्रकाश प्रभाव विशाल खत्री का रहा।


भव्य हुवा समापन :-
नाटक समारोह के संयोजक विद्या सागर आचार्य ने बताया की ख्यातिप्राप्त रंगकर्मी अर्जुन देव चारण के सानिध्य में आयोजित भव्य समापन समारोह में रंग आनंद अवार्ड वरिष्ठ रंगकर्मी बुलाकी भोजक को अर्पित किया गया। अवार्ड के अंतर्गत 11000/- नगद, सम्मान पत्र, शाल आदि भेंट किये गये।
इस अवसर पर आनंद वि. आचार्य की अंतिम नाट्य कृति “सरदार” का विमोचन भी किया गया। इस मौके पर मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार, रंग निर्देशक अर्जुनदेव चारण ने कहा, पांच दिन से हम आनंद वि.आचार्य याद में ही रोज एकत्रित हो रहे हैं। किसी भी रचनाकार की याद का इससे अच्छा कोई उपक्रम नहीं हो सकता। जिस काम को वो करता था आप उस काम की कंटीन्यूटी बनाये रख रहे है। उसको सच्ची श्रद्धांजलि यही है कि वह नाटक करता था तो आप उसकी याद में नाटक करते रहो। वह आदमी स्मृतियों में जीवित रह जाएगा।


राजस्थानी में कहावत है कि दो चीजें स्मृतियों में रहती हैं ‘गीतड़ा अर भीतड़ा’। आनंद खुद रचनाकार थे और रचनाओं मंे वह लोगों की चेतना जागृत करने का काम जीवनभर करता रहा। यह पूरा आयोजन उसको अमरता प्रदान करता है जिसकी अभिलाषा हर मनुष्य अपने जीवन में करता है। कार्यक्रम में मधु आचार्य आशावादी, प्रदीप भटनागर, रोहित बोड़ा आदि ने भी विचार रखे।


मुख्य समन्वयक अभिषेक आचार्य ने बताया की इस नाट्य समारोह में एक सौ पचास से भी अधिक रंगकर्मियों ने शिरकत की जो बीकानेर रंगमंच के लिये अपने आप में एक उपलब्धि है।पूरे नाट्य समारोह में वरिष्ठ रंगनेत्री श्रीमती आभा संकरन के साथ साथ सुधेश व्यास, प्रदीप माथुर, रमेश शर्मा, मालू सिंह, सुरेश हिंदुस्तानी, सुनील जोशी, नवल व्यास, अविनाश व्यास, कविता व्यास, अतुल व्यास, राजीव लोचन आदि का सानिध्य रहा । वरिष्ठ रंगकर्मी मधु आचार्य आशावादी , प्रदीप भटनागर ने सभी कलाकारों, दर्शकों व आयोजन समिति के सदस्यों का धन्यवाद ज्ञापित करते हुवे अगले वर्ष फिर मिलने की आशा व्यक्त की ।

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