जोशी के हिन्दी कहानी संग्रह ‘सायानी छोरी’ का हुआ लोकार्पण
टुडे राजस्थान न्यूज़ (अज़ीज़ भुट्टा )
बीकानेर 12 अक्टूबर । पोकरमल राजरानी गोयल ट्रस्ट बीकानेर के तत्वावधान में आज सायं के समय होटल राज महल बीकानेर , के सभागार में हिन्दी कहानी संग्रह ” सायानी छोरी ” का लोकार्पण हुआ। पुस्तक सयानी छोरी के लेखक है राजेंद्र जोशी । आप बीकानेर के साहित्य जगत में सबसे अधिक सक्रीय और प्रतिबद्ध व्यक्ति है राजस्थानी /हिंदी / उर्दू के साथ अन्य भाषाओं के साहित्य स्वरुप के समग्र विकास के लिए उसका प्रमुख कारण ये भी है की आप शिक्षा विद है , साथ ही सरकारी प्रौढ़ शिक्षा विभाग से सेवानिवृत भी है और अब स्वतंत्र रूप से साहित्य लेखन और साहित्य को समर्पित जीवन जी रहे है। आप का सृजनात्मक जीवन जीने का तरीका , हम जैसे युवा सृजनधर्मी के लिए प्रेरक पुंज की भूमिका में भी मुझे नजर आता है ।

राजेंद्र जोशी के कहानी संग्रह ” सयानी छोरी ” का लोकार्पण समारोह संचालित हुआ । बीकानेर के वरिष्ठ साहित्यकार जिनमे डॉ. उमाकांत गुप्त , डॉ. मदन सैनी , डॉ. नरेश गोयल और साहित्यकार मधु आचार्य आशावादी और पुस्तक सायानी छोरी के लेखक राजेंद्र जोशी को ।
गरिमामय मंच के सुशोभित होने के उपरांत संचालक महोदय ने आमंत्रित किया डॉ. नरेश गोयल को आप पोकरमल राजरानी ट्रस्ट के साथ होटल राज महल बीकानेर के निदेशक भी है । डॉ. नरेश गोयल ने स्वागत करता की भूमिका का निर्वाहन करते हुए आये हुए सभी प्रबुद्ध जन का स्वागत करते हुए बीकानेर के साहित्य जगत को स्वतंत्र रूप से आमंत्रित किया। साहित्य गतिविधियों के लिए उनके होटल राजमहल में बने सभागार के उपयोग हेतु ! जब डॉ. नरेश गोयल ये बात कह रहे थे मुझे उस समय एडवोकेट स्वर्गीय उपध्यान चंद कोचर की स्मृति हुई , उन्होंने भी अपने होटल मरुधर हेरिटेज में एक परिसर साहित्य को समर्पित कर दिया था जो आज भी साहित्य के लिए प्रतिबद्धता के साथ उपलब्ध है।

जिसे मैंने उस समय फेसबुक पोस्ट के जरिये एक संज्ञा दी थी ” श्री कोचर गुफा ” ! दरसल साहित्य आयोजन के लिए स्थान का बड़ा महत्व होता है और डॉ. नरेश गोयल जैसे साहित्य अनुरागी अगर ऐसा विचार रखते है तो आने वाले समय में बीकानेर के साहित्य आयोजन के लिए ये एक उपलब्धि वाली बात भी होगी साथ में पूर्ण सुविधा भी सफल साहित्य आयोजन के सन्दर्भ में और हो सकता है इस प्रकार की सुविधा के चलते बीकानेर में बीकानेर से बाहर के साहित्य आयोजन भी होने आरम्भ हो जाए हमारे बीकानेर में क्यों की जहां चाह वहाँ राह ।
डॉ, नरेश गोयल के स्वागत उद्बोधन के बाद वरिष्ठ साहित्यकार राजाराम स्वर्णकार को , आप ने साहित्यकार राजेंद्र जोशी के साहित्य सृजन पथ का क्रमवार विवरण सहित उल्लेख करते हुए उनकी साहित्य सृजन की यात्रा की विशेष उपलब्धियों को प्रकाशित और इंगित करते हुए उनके व्यक्तित्व और कृतित्व को साझा करते हुए लेखक राजेंद्र जोशी जी का परिचय दिया ।

फिर हिंदी कहानी संग्रह ” सायानी छोरी ” का लोकार्पण मंच से हुआ जिसके साक्षी बने मंच पर साहित्यकार राजाराम स्वर्णकार ,स्वयं लेखक राजेंद्र जोशी , डॉ. मदन सैनी , डॉ. उमाकांत गुप्त , साहित्यकार मधु आचार्य आशावादी, डॉ. नरेश गोयल और पुस्तक के प्रकाशक प्रशांत बिस्सा और दर्शक दीर्घा में उपस्थित हम सभी साहित्य अनुरागी बीकानेर के ।
कहानी संग्रह सयानी छोरी पर पत्रवाचन किया डॉ. रेणुका व्यास ने , आप ने पुस्तक में प्रकाशित लगभग सभी कहानियों को स्पर्श करते हुए अपने समीक्षात्मक और विश्लेषणात्मक पर्चे को पढ़ा। आप ने नारी विमर्श की लेखक की विचारणा को भी अपने पत्र से प्रकाशित किया ।आप के पत्र से सायानी छोरी कहानी संग्रह का सार सब के समक्ष स्पष्ट रूप से मुखरित हुआ जो आप के पत्र वाचन की सार्थकता रही !
पत्रवाचन के उपरांत कहानी संग्रह सायानी छोरी के लेखक राजेंद्र जोशी को डेस्क पर आमंत्रित किया संचालक ने , लेखक साहित्यकार राजेंद्र जोशी ने कहा की मैं आप सब की उपस्थिति का अभिनन्दन करता हूँ।फिर आप ने अपनी इस कहानी संग्रह सायानी छोरी के निर्माण या सृजन की मूल विचारणा जिसे आज कंटेंट कहते है उस पर बात की ! आपने यथार्थ को चित्रित करने में आनंद की अनुभूति की बात कही , आप को वो आनंद कहानी रचने में मिलता है , आप ने कविता के सन्दर्भ में भी कहा की कविता कठिन है मेरे लिए बनिस्पत कहानी के !
( उस समय मैंने ये सोचा एक कलाकार की दृष्टि से कि साहित्य भी तो शिल्प ही है , जैसे की पत्थर , मिटी , लकड़ी , प्लास्टर ,प्लास्टिक आदि का शिल्प ! माध्यम शिल्पकार हमेशा वही चुनता है या उसे चुनना चाहिए जो उसे सहज और सुलभ के साथ आनंद की अनुभूति करवाए अपने सृजन कर्म / शिल्प के रचाव को करते हुए ) साहित्यकार राजेंद्र जोशी ने समय की बचत को देखते हुए अपने कहानी संग्रह सयानी छोरी की कोई कहानी नहीं पढ़ी । पाठक के लिए जिज्ञासा रचते हुए , ये पावा हमकले कदेई कढ़ा देसो वाला भाव रखा ।
आपने ये कहानी संग्रह सयानी छोरी को समर्पित किया है समाजसेवी / व्यवसायी राजेश डॉ. नरेश गोयल को जिनको आप ने अपने हाथ से ये कहानी संग्रह सयानी छोरी भेंट की ।
फिर मुख्य वक्ता के रूप में श्री डूंगरगढ़ से पधारे भाषा विज्ञानं के शास्त्री डॉ. मदन सैनी ने कहानी संग्रह सयानी छोरी पर अपनी बात कहते हुए कहा की , मुझे राजेंद्र जोशी की इस कहनी संग्रह को पढ़ते हुए साहित्यकार यादवेंद्र चंद्र शर्मा के दलित विमर्श की वे कहानियां याद आती है जिनमे उन्होंने अलग अलग पिछड़े जन जीवन को अपनी कहानी का मूल विषय और किरदार भी बनाया। सयानी छोरी कहानी संग्रह में भी मुझे कहानियों में पिछड़े अशिक्षित और दबे हुए समाज की यथार्थ घटना का चित्रण नजर आया है ! आप ने कहा राजेंद्र जोशी की ये कहानियाँ शिक्षा , संस्कृति और व्यवस्था के समक्ष एक प्रश्न भी रखती है की ऐसा क्यों ?
चूँकि आप भाषा विज्ञानं के डॉक्टर है तो आप ने प्रकाशक प्रशांत बिस्सा की भूरी भूरी प्रशंसा की साथ ही पुस्तक सायानी छोरी के आवरण की भी तारीफ़ करते हुए भाषा गत परिभाषा से पुस्तक की प्रस्तुति को सराहा !
विशिष्ट अतिथि की भूमिका में बोलते हुए वरिष्ठ साहित्यकार मधु आचार्य आशावादी ने कहा की कहानी कहे हुए को फिर से कहने की एक विधा है ! जब मधु जी बोल रहे थे उस समय मुझे मेरी कला शिक्षा की पढाई के दौरान के कला तर्क याद आये जिनमे मैंने प्लेटो और अरस्तु के कला तर्क को पढ़ा था , वो था प्रकृति की कृति की अनुकृति की अनुकृति ! साहित्यकार राजेंद्र जोशी ने भी अपने उद्बोधन में कहा था की मेरी कहानियों में लोक की छाया है। साहित्यकार मधु आचार्य आशावादी ने वही से अपनी बात को आरम्भ किया और कहा की कोई भी घटना , यथार्थ देखकर या भोगकर रचनाकार उसे अपने सृजन का विषय या आधार बनता है। फिर उसका वो रचा हुआ यथार्थ पाठक या दर्शक के विचारों को दर्शन की और मोड़ता है। यही कार्य राजेंद्र जोशी की ये कहानी संग्रह की पुस्तक सायानी छोरी कर रही है ये यथार्थ से दर्शन तक का सफर करवाती है पाठक को ।
आपने लेखक के संवेदनशील होने के कारण ही इस सायानी छोरी जैसे कहानी संग्रह के कंटेटं को बहुत ही गंभीर और सहज रूप से कहानी के माध्यम से कह पाने में सफल हुए है , ऐसा मंच से कहा ।
अंत में अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए डॉ. उमाकांत गुप्त ने अपने चित परिचित काव्य मय शैली में कहा की राजेंद्र जोशी जी अब परिपक्वता को पा रहे है साहित्य लेखन में , सायानी छोरी कहानी संग्रह उसका प्रत्यक्ष प्रमाण है । आपने कहा की राजेंद्र जी का ये लेखन कार्य पाठक को रस, विषय, कथन, सामयिक तर्क वितर्क , के साथ उद्वेलित होने को बाध्य करता है जो कहानी लेखन की सार्थकता को सिद्ध कर रहा है। आप ने काव्य मय शब्दों में जो कुछ कहा उसे बिना रिकॉर्ड किये प्रस्तुत करना संभव नहीं मेरे लिए सो क्षमा ।
मंच से सभी आये हुए आगुन्तकों का आभार ज्ञापित किया उप निदेशक जनसम्पर्क विभाग बीकानेर डॉ. हरी शंकर आचार्य ने ।
मंच से सभी अतिथि जन के साथ पत्रवाचक और लेखक परिचय देने वाले गणमान्य व्यक्तित्व का सम्मान उन्हें सोल , मोती की माला और एक प्रतिक चिन्ह भेंट करते हुए किया गया । आज सम्मान की प्रक्रिया में नवाचार ये हुए की एक सम्मानित होने वाले व्यक्ति को सात प्रबुद्धजन ने सम्मानित किया अपने कर कमलों से ।
और साथ ही कहानी संग्रह सयानी छोरी के लेखक राजेंद्र जोशी का सम्मान भी मंच से किया गया इस उपक्रम में मुझे भी उन्हें उनका स्वयं का व्यक्ति चित्र पेन्सिल स्केच योगेंद्र पुरोहित द्वारा चित्रित किया गया में भेंट करने का अवसर मंच से मिला सो साधुवाद आयोजन समिति को । सरगम का संचालन ज्योति रंगा ने किया।



