धूमधाम से मनाया भगवान महावीर जन्म कल्याणक महोत्सव
टुडे राजस्थान न्यूज़ (अज़ीज़ भुट्टा )
जैन महासभा बीकानेर ने तीन दिवसीय महोत्सव सेवा और भक्ति भाव के साथ मनाया।
जैन महासभा बीकानेर द्वारा भगवान महावीर जन्मकल्याणक महोत्सव बड़े धूम धाम एवं हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। तीन दिवसीय कार्यक्रम के तहत 29 मार्च को महावीर पार्क में नवकार मंत्र के जाप से कार्यक्रम का आगाज किया गया। तत्पश्चात बीकानेर के आचार्य तुलसी रिजनल कैंसर रिसर्च सेंटर, ट्रोमा सेन्टर, मुक बधिर आश्रम, अपना घर आश्रम न.2 , अंध विधालय, अनाथालय आदि स्थानों पर फल वितरण किये।

30 मार्च को एक शाम भगवान महावीर के नाम कार्यक्रम रखा गया। जिसमें बीकानेर के प्रतिष्ठित भजन गायकों ने अपने भजनों से भगवान की भक्ति की। इस अवसर पर भजन सम्राट स्व. मगन जी कोचर को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके समाज हित में एवं संगीत के क्षेत्र में उनके दिए गए योगदान को याद किया गया।
आज भगवान महावीर जन्मकल्याणक के अवसर पर जैन महासभा बीकानेर के द्वारा विशाल शोभा यात्रा बीकानेर के तीन क्षेत्रों से एक साथ शुरू हुई।

गंगाशहर – भीनासर से जैन जवाहर विधा पीठ से दूसरी सुराणा स्वाध्याय सदन से व तीसरी दिगंबर नशिया मंदिर से। तीनों शोभा यात्रा का संगम बीकानेर भुजिया बाजार में हुआ वहाँ से शोभा यात्रा गौडी़ पार्श्वनाथ मन्दिर परिसर में पहुंची जहाँ विशाल धर्म सभा में समाहित हो गई।
आज इस विशाल शोभा यात्रा में विभिन्न स्कूलों व धार्मिक संगठनों ने 84 झांकियां प्रर्दशित की गई। जो भगवान के संदेशों और जीवन दर्शन की झलक दिखा रही थी।
कार्यक्रम में उद्बोधन देते हुए आचार्य श्री महाश्रमण के शिष्य मुनि श्री अमृत कुमार जी ने कहा कि भगवान महावीर ने इस धरा पर जन्म लेकर आलोकित कर दिया।

हमारा जैन मंत्र नवकार भी जैन एकता का प्रतीक है।
हमारी सामायिक, नवकार, मंगलपाठ, तपस्या सभी एकता की प्रतीक है। बीकानेर जैन महासभा के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि 21 व्यंजन सीमा अभियान से प्रत्येक परिवार को जुड़ना चाहिए। जैन महासभा बीकानेर के जैन समाज के लिए मुख्या, मातृत्व, पितृत्व के रूप में अपना दायित्व निभा रही है। 1% से भी कम जैनी 22% से अधिक का दायित्व निभा रहे हैं। जैन का जैनैत्व भी बढ़ता रहना चाहिए।
इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए मुनि श्री उपशम कुमार ने भगवान महावीर स्वामी के 27 भवों का वर्णन करते हुए कहा कि कषायों पर विजय पाना जररूरी है।। कषायों को दूर करने से ही परम लक्ष्य मोक्ष को प्राप्त किया जा सकता है। जन्म मरण के चक्कर से मुक्ति मिल सकती है।

आचार्य श्री महाश्रमण जी की शिष्या साध्वी श्री रश्मि प्रभा ने आत्मा भिन्न है शरीर भिन्न है कि एक माला जपते हुए ध्यान के द्वारा अनुभव करने की प्रेरणा देते हुए कहा कि ऐसा एक वर्ष लगातार करने से आप अपने आप में हुवे परिवर्तन को स्वयं अनुभव कर सकते हैं। साध्वी श्री जी ने गीतिका के माध्यम से भगवान महावीर के गुणों का गुणगान किया।
आचार्य श्री महाश्रमण जी की शिष्या साध्वी श्री कल्पयशा जी ने प्रवचन देते हुए कहा कि भगवान का जन्म दिन अहिंसा, करूणा ओर मैत्री का जन्म दिन है। भगवान महावीर को एक दिन नही प्रति दिन याद रखे। उन्हें भुले नही। उनके बताऐं मार्ग पर चले। समाज में ओर अधिक एकता बढे। बीकानेर जैन समाज का यह आयोजन जैन एकता को और अधिक पुष्ठ करता है। किसी भी संगठन के लिए उसका रजत जयंती वर्ष मनाना आपसी एकता की मिसाल है।
मुख्य अतिथि गौरव बोथरा IAS, का परिचय महासभा के सह मंत्री मनीष नाहटा ने दिया।
तपागच्छ संघ से अर्पित गुणा श्री ने कहा भगवान महावीर ने जन्म मरण की श्रृंखला को तोड़ दिया, इसलिए हम जन्मकल्याणक महोत्सव मनाते है। यह लोकोत्तर पर्व है।
तपागच्छ सेअमित गुणा श्री ने गीतिका का संगान किया। तथा भगवान के पांच कल्याणक के बारे में बताया।
तपागच्छ से साध्वी अर्चित गुणा श्री ने कहा की कषाय दूर हो जाने से कैवल्य ज्ञान होता है। हम हर समय पाप से बचने का प्रयास करे।
भगवान के प्रति अपनेपन का भाव जाग्रत करे। भगवान महावीर ने बहुत कठोर जीवन जिया। बहुत परिश्रम किया। ध्यान साधना के द्वारा अपने संचित कर्मों का क्षय करके मुक्ति का मार्ग प्रशस्त किया।
कार्यक्रम में जैन महासभा के अध्यक्ष कन्हैयालाल बोथरा ने सभी का स्वागत करते हुए कहा कि इस बार हमारा लक्ष्य है कि जैन महासभा का अपनी जगह पर अपना एक भवन हो। उन्होंने जैन महासभा की सभी गतिविधियों को और अधिक कुशलता से सम्पादित करने का संकल्प व्यक्त किया।
जैन महासभा के पूर्व अध्यक्ष जैन लूणकरण छाजेड़ ने महासभा की स्थापना से लेकर आज संस्था के 25 वर्षों रजत जयंती तक के सभी आयामों पर प्रकाश डाला।
समाजिक समरसता बढा़ने के लिए 21 व्यंजन सीमा अभियान की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए ज्यादा से ज्यादा लोगों को इस अभियान से जुड़ने की प्रेरणा दी।
विधार्थियो के लिए जैन महासभा द्वारा किये जा रहे कार्यों को बताते हुए कहा कि प्रायः प्रति वर्ष जरूरतमद परिवारों के बच्चों को एक निश्चित रकम शिक्षा सहायता के रूप में दी जाती है।
जैन महासभा के मंत्री जतनलाल संचेती ने बताया कि भगवान महावीर ने कहा कि जितने व्यक्ति हैं उतने ही विचार है। विचार समान हो जाये, यह कभी संभव नही है। यह अवश्य सम्भव है कि विचारों की विविधता में भी संघर्ष नही हो ओर जैन महासभा बीकानेर भगवान के सिद्धांतों का अनुसरण कर रहा है।
इस अवसर पर जैन महासभा की महिला विंग के अध्यक्षा श्रीमती प्रेम नौलखा ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि सभी बहिनों को महिला विंग के साथ जुडकर भगवान महावीर के सिद्धांतों को घर घर पहुंचाने के प्रयासों में अपना योगदान देना चाहिए।
कार्यक्रम में महासभा की महिला विंग ने गीतिका का संगान किया एवं भगवान महावीर की माता त्रिशला को आये 14 स्वप्नों के बाद में लघु नाटिका के माध्यम से बताया।
जैन पब्लिक स्कूल के बच्चों ने रोबोट के माध्यम से भगवान महावीर की आरती का संगान किया। AI व आधुनिक तकनीकी के माध्यम का झांकी में उपयोग किया।
एवं सभी 24 तीर्थकरों की स्तुति की।
मुख्य अतिथि गौरव जी बोथरा ( IAS) ने भगवान महावीर के अनेकान्तवाद दर्शन को विश्व की समस्त समस्याओं के हल का रास्ता बताया।
कार्यक्रम में गौरव बोथरा ( IAS), राकेश बोहरा GM ICICI Bank व कान्तिलाल जैन (जसोल) का सम्मान जैन कन्हैयालाल बोथरा, चम्पकमल सुराणा, विजय कोचर, इन्दरमल सुराणा, जयचंद लाल डागा, जैन लूणकरण छाजेड़, जैन विनोद बाफना, जैन मेधराज बोथरा, जैन कुनाण कोचर, जैन मोहन सुराणा, जैन मेधराज सेठिया आदि कार्यकर्ताओं ने किया।
झांकियों के बारे में मनोज सेठिया ने जानकारी प्रदान की
आभार ज्ञापन महासभा के उपाध्यक्ष संजय सांड ने किया। संजय सांड ने बताया कि इस तीन दिवसीय आयोजन में सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग किया। सभी सहयोगी संस्थाओं के पदाधिकारियों ने भी कार्यक्रम को सफल बनाने में महनीय योगदान दिया। सभी स्कूलों ने अपने प्रयासों से भगवान महावीर के जीवन दर्शन पर झांकियों को सुसज्जित करके शोभायात्रा में शोभा बढाई।
सभी अनुदान दाताओं का आभार व्यक्त किया। सभी साधु – साध्वियों के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित की।
कार्यक्रम का संचालन महासभा के महामंत्री जैन जतनलाल संचेती ने किया।



