नवीन संकाय सदस्यों के लिए कार्यशाला का हुआ शुभारंभ

0
29

टुडे राजस्थान न्यूज़ (अज़ीज़ भुट्टा )

राजकीय डूंगर महाविद्यालय में नवीन संकाय सदस्यों के लिए द्विदिवसीय अभिमुखीकरण कार्यशाला का शुभारंभ

बीकानेर, 17 जुलाई। राजकीय डूंगर महाविद्यालय के इंटरनल क्वालिटी एश्योरेंस सेल (IQAC) के तत्वावधान में वर्ष 2023 के पश्चात नियुक्त नवीन संकाय सदस्यों के लिए द्विदिवसीय संकाय अभिमुखीकरण कार्यशाला के प्रथम दिवस का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य नवनियुक्त सह आचार्यों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, भारतीय ज्ञान प्रणाली, महाविद्यालय की शैक्षणिक विकास यात्रा, प्रशासनिक व्यवस्था तथा संस्थान की विशिष्ट उपलब्धियों से परिचित कराना रहा।

कार्यक्रम का शुभारंभ प्राचार्य प्रो. राजेन्द्र कुमार पुरोहित के प्रेरक उद्बोधन से हुआ। उन्होंने नवीन संकाय सदस्यों का स्वागत करते हुए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, नवाचार और सतत् सीखने की भावना के साथ विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

प्रथम तकनीकी सत्र में प्रो. अन्नाराम शर्मा ने उच्च शिक्षण संस्थानों में संस्थापन प्रबंधन, तकनीकी प्रक्रियाओं एवं नवाचारों की जानकारी दी। इसके पश्चात प्रो. स्मिता जैन ने महाविद्यालय की शैक्षणिक संस्कृति, अनुशासन एवं शिक्षकों की जिम्मेदारियों पर अपने विचार साझा किए। वहीं प्रो. चन्द्रशेखर कच्छावा ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 एवं भारतीय ज्ञान प्रणाली के विभिन्न आयामों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए उच्च शिक्षा में बहुविषयक अध्ययन, कौशल विकास, शोध एवं नवाचार के महत्व पर चर्चा की।

द्वितीय तकनीकी सत्र में प्रो. नरेंद्र भोजक ने महाविद्यालय की स्थापना से लेकर वर्तमान तक की विकास यात्रा का विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने संस्थान द्वारा लगातार तीन बार NAAC में A+ ग्रेड प्राप्त करने की उपलब्धि, समृद्ध शैक्षणिक एवं भौतिक अधोसंरचना, प्रयोगशालाओं, पुस्तकालय एवं अन्य सुविधाओं की जानकारी दी।

कार्यशाला के दौरान समन्वयक डॉ. हेमेन्द्र भंडारी ने नवीन संकाय सदस्यों के साथ संवाद करते हुए उनकी जिज्ञासाओं एवं अपेक्षाओं पर चर्चा की तथा शिक्षण कार्य से जुड़े व्यावहारिक पहलुओं पर मार्गदर्शन प्रदान किया। वहीं डॉ. सुरेश वर्मा ने कैरियर एडवांसमेंट स्कीम (CAS) एवं उच्च शिक्षा में संकाय सदस्यों के अकादमिक विकास से संबंधित विभिन्न अवसरों की जानकारी दी।

समापन सत्र में डॉ. देवेश सहारण एवं डॉ. रवि परिहार ने प्रेरणादायक संबोधन देते हुए कहा कि किसी भी शिक्षक की वास्तविक पहचान उसका पद नहीं, बल्कि उसकी शिक्षण क्षमता, विद्यार्थियों से जुड़ाव और कक्षा में दिया गया समय होता है। उन्होंने सभी शिक्षकों से अधिकाधिक कक्षाएँ लेने, विद्यार्थियों के साथ सतत संवाद बनाए रखने तथा एक आदर्श शिक्षक के रूप में अपनी भूमिका का सफल निर्वहन करने का आह्वान किया।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here