न कोई माला, न कोई मेहमान.. ‘खेजड़ली उच्छब’ मनाने उमड़ आई आवाम

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टुडे राजस्थान न्यूज़ (अज़ीज़ भुट्टा )

न कोई माला, न कोई मेहमान.. ‘खेजड़ली उच्छब’ मनाने उमड़ आई आवाम

-सुमित शर्मा

बीकानेर 05 जुलाई । बचपन में हर बच्चे की तरह मुझे भी पतंगों का शौक था। इतना शौक था कि अक्षय तृतीया से एक रात पहले मारे ख़ुशी के नींद ही नहीं आती थी। बीती रात भी नींद नहीं आई। …लेकिन इस बार पतंगों की वजह से नहीं, बल्कि ‘खेजड़ली उच्छब’ की वजह से। वो आयोजन, जिसे सफल बनाने के लिये ‘बीकानेर वैचारिक जागरण मंच’ कई हफ्तों से जुटा हुआ था। ..और आज वो दिन आ चुका था। 5 जुलाई 2026 का दिन। यानी खेजड़ली उच्छब…। उच्छब- 11,000 राज्यवृक्ष-खेजड़ी के पौधरोपण का।

बीकानेर शहरी परिधि से निकलते ही हवा साफ हो जाती है। यहां वो मनहूसी धुआं नहीं रहता, जिसके लिये दिल्ली जैसे महानगर बदनाम हैं। सांस लें तो भीतर तक ठंडक महसूस होती है। सुबह क़रीब 5.30 बजे मेरा स्कूटर सुजानदेसर गोचर में एंट्री कर चुका था। तब ‘बीकानेर वैचारिक जागरण मंच’ के पदाधिकारी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दे रहे थे। बार एसोसिएशन के अजय पुरोहित, योगगुरु विनोद जोशी, वरिष्ठ पत्रकार हेम शर्मा, मोखराम धारणिया, प्रशांत तंवर समेत दर्जनों लोग तैयारियों में जुटे थे। सुबह 6 बजने के साथ ही लोगों का जमावड़ा लगना शुरु होने लगता है।

पुण्य रौ काम है..
आज की सुबह रोज़ाना से ज़ियादा ग़र्म थी। हवाओं में दबाव साफ महूसस हो रहा था, जो पैदल चलकर आने वालों की ललाट से पसीना बनकर टपक रहा था। फिर भी लोगों के जत्थे चले आ रहे थे। रविवार होने के चलते बच्चे, बूढ़े, महिला, पुरुष सब इस कार्यक्रम में शिरकत कर रहे थे। एक विशाल जन मेदिनी के रूप में। जत्थे-दर-जत्थे। उन्हीं गुज़रते जत्थों में एक लड़के ने दूजे से मसखरी करते हुए पूछा- “कियां महाराज ! आज तौ दीतवार है, नींद कियां खुल ग्यी?” दूजे नै जवाब दिया- “नींद तो भेर लेय लैयसां, ओ पुण्य रौ काम है, लारै कियां रेवां?” मुझे लगा कि पर्यावरण में परमेश्वर देखकर कितना सुंदर तरीक़े से शुक्रिया अदा किया जा सकता है। “नींद तो भेर लेय लैयसां……।” अप्रतिम।

न कोई माला, न कोई मेहमान
खेजड़ली उच्छब में न कोई माला रखी गई थी और न कोई मेहमान। कहीं पर भी, किसी तरह की, कोई औपचारिकता नहीं। कोई आम नहीं..कोई ख़ास नहीं। सब एक समान। आयोजकों का कहना था कि “हमने पूरे क्षेत्र को 22 ब्लॉक में बांटा है। सबको अलग-अलग ब्लॉक में पौधरोपण करवाने की व्यवस्था की है। ये एक सामाजिक कार्यक्रम है। जिसका एकमात्र उद्देश्य खेजड़ी संरक्षण का संदेश देना है।”

पद्मश्री से सम्मानित हस्तियों ने की शिरकत
तपते तावड़े के बावजूद लोग खेजड़ली उच्छब मनाने दूर-दूर से आए। कोई भीलवाड़ा से आया तो कोई जोधपुर से। कोई दिल्ली से आया तो कोई जयपुर से । एक दौर था, जब चिपको आंदोलन के प्रणेता सुंदरलाल बहुगुणा बीकानेर आए थे। तब उन्होंने भीनासर में चल रहे गोचर आंदोलन में शिरकत करके गोचर संरक्षण का संदेश दिया था। और आज इस खेजड़ली उच्छब में पद्मश्री से सम्मानित श्यामसुंदर पालीवाल (पिपलांत्री, राजसमंद) और हिम्मताराम भांभू (नागौर) ने शिरकत करके खेजड़ी संरक्षण का व्यापक स्तर पर संदेश दिया है।

363 महिलाओं ने निकाली शोभायात्रा
इस उच्छब में बिश्नोई समाज की 363 महिलाओं ने एक खेजड़ली उच्छब की शोभायात्रा निकाली। महिलाओं ने गीत गाते हुए खेजड़ीरोपण किया और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

खेजड़ली उच्छब में ये भी आए

खेजड़ली उच्छब में स्वामी विर्मशानंद गिरि, रामेश्वरानंद, महंत सरजूदास समेत कई धार्मिक गुरुओं और साधु-संतों ने शिरकत की। संतों ने खेजड़ी का महत्व बताते हुए ‘खेजड़ली उच्छब’ को हर साल मनाने की बात कही। इसके अलावा खेजड़ी बचाओ आंदोलन के परसराम बिश्नोई, सुभाष बिश्नोई ने भी शिरकत की। आयोजन में वेटेरनरी विवि के वीसी सुमंत व्यास, खाजूवाला विधायक विश्वनाथ मेघवाल, बीजेपी ज़िलाध्यक्ष सुमन छाजेड़ समेत बीजेपी-कांग्रेस के कई नेताओं ने शिरकत की।

इन संस्थाओं का मिला सहयोग-
इस आयोजन को ज़िले की कई संस्थाओं का सहयोग मिला। ऑवर फोर नेशन, भारतीय कंपनी सचिव संस्थान, योगा प्रशिक्षण समिति, रोटरी क्लब, लॉयन्स क्लब, भाजपा, कांग्रेस, स्काउट, एसकेआरएयू, वेटेनरी विवि, बार एसोसिएशन, विश्नोई समाज, जैन समाज, तेरापंथ युवक परिषद, स्कूल-कॉलेज, स्वयं सेवक, समेत कई खेल संगठन का सहयोग रहा।
कुल मिलाकर, सुजानदेसर गोचर में जिस अंदाज़ में ‘खेजड़ली उच्छब’ मनाया गया, वो अद्भुत था। 5 जुलाई 2026 की तारीख़.. अब फ़क़त तारीख़ नहीं रही, बल्कि बीकानेर के कलेंडर में एक यादगार दिन के तौर पर चस्पा हो गई। ‘खेजड़ली उच्छब’ के ये रंग बताते हैं कि खेजड़ी फकत पेड़ नहीं, बल्कि बहुत कुछ हैं। खेजड़ली उच्छब में आए रामकिशन डेलू की कविता में कहें तो-

पर उपकारी बनो वृक्षन से, जीवन को नेकी से जोड़ो।
हरी-भरी कर दो धरती को, अपने फर्ज़ से मुंह न मोड़ो।

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