टुडे राजस्थान न्यूज़ (अज़ीज़ भुट्टा )
05 अगस्त को जयपुर में गोपालन निदेशालय के साथ राजस्थान की गौशालाओं के दोनों संगठनों की संयुक्त बैठक का आयोजन।
बीकानेर 08 अगस्त । 05 अगस्त को निदेशालय, गोपालन विभाग, जयपुर में माननीय निदेशक श्रीमती कश्मी कोर की अध्यक्षता में गोपालन निदेशालय में गौ ग्राम सेवा संघ राजस्थान व राजस्थान गो सेवा समिति दोनों संगठनों के साथ में गौशालाओं की विभिन्न मांगों के संदर्भ में बैठक का आयोजन किया गया, उक्त बैठक में गौशालाओं के संचालन, लंबित अनुदान एवं गौशालाओं के समक्ष आ रही विभिन्न समस्याओं और बाधाओं के संबंध में विस्तार से चर्चा की गई।
गौशालाओं को सुदृढ़ बनाने, गोवंश संरक्षण को बढ़ावा देने तथा गौसेवा कार्यों को और अधिक प्रभावी बनाने हेतु आवश्यक सुझाव भी प्रस्तुत किए। साथ ही प्रदेश की गौशालाओं की वास्तविक स्थिति एवं उनकी प्रमुख समस्याओं से अवगत कराया।
कल की बैठक से गोपालन विभाग राजस्थान से यह आशा की जाती है कि गौशालाओं की समस्याओं के समाधान एवं गोपालन क्षेत्र के विकास के लिए सकारात्मक पहल की जाएगी।

5 अगस्त की बैठक में निम्नलिखित मुद्दों पर चर्चा हुई –
जिन जिन गौशालाओं के बिल इकजाई बिल अपलोड हो गए है व उनकी वित्तीय स्वीकृति (fs) हो चुकी है, उनको 15 अगस्त तक अनुदान की राशि मिल जाएगी, राज्य सरकार ने 2000 गौशालाओं को 15 तारीख से पहले अनुदान देने की प्रतिबद्धता दिखाई है।
भारत पशुधन ऐप( इनाफ) में टैग की एंट्री 100% करने व उसकी प्रमाणित कॉपी गौशालाओं को देने पर व प्रपत्र 5 से मिलान करने पर सहमति बनी 12 डिजिट के टैंगो का कलर अब से गौशालाओं के लिए “”भगवा”” कलर होगा।
गौशालाओं को बिजली के बिल में 50% की छूट दी जाएगी उसके लिए विभाग द्वारा सभी डिस्कॉम को पत्र जारी होगा।
भूमि लीज पर देने व आवंटन के लिये सभी जिला कलेक्टर को विभाग द्वारा पत्र लिखा जाएगा।
प्रत्येक जिला स्तर पर संयुक्त निदेशक पशुपालन विभाग के द्वारा गौशाला संचालकों के साथ 3,3 महा में प्रशिक्षण, संवाद, शिकायत निवारण के लिए बैठकों का आयोजन किया जाएगा, इसकी कार्य योजना बनाने के लिए सहमति बनी।
अप्रैल,मई,जून,जुलाई के बिलो के लिए 30 सितम्बर 2026 तक के बिल लगाए जाएंगे।
वित्त विभाग द्वारा भुगतान के लिए नया कंप्यूटर सॉफ्टवेयर डेवलप किया, जिसको अपडेशन करने के लिए निदेशक महोदया ने सभी गौशालाओं से खाता नंबर चेक करके अपनी सहमति प्रदान करने के लिए कहा,जिन गौशालाओं (IFMS) में सही kahataa नंबर अपलोड कर दिये है, उनको अनुदान की राशि 15 अगस्त से पूर्व मिल जायेगी।
बैठक में गोवंश के कानों में लगाए जाने वाले 12 अंकों के डिजिटल टैग के विषय पर भी चर्चा हुई। विभाग ने बताया कि सितंबर 2026 तक सभी गौशालाओं में डिजिटल टैगिंग का कार्य युद्ध स्तर पर पूर्ण कर लिया जाएगा, जिससे भविष्य में इस प्रकार की प्रशासनिक एवं तकनीकी समस्याओं का सामना गौशालाओं को नहीं करना पड़ेगा।
बैठक में निराश्रित नर गोवंश के संरक्षण हेतु जिला स्तरीय नंदीशाला योजना पर विचार-विमर्श किया गया। विभाग द्वारा बताया गया कि प्रत्येक नंदीशाला के लिए लगभग 20 बीघा भूमि की आवश्यकता होगी तथा निर्माण हेतु लगभग ₹3 करोड़ की राशि उपलब्ध कराई जाएगी। इस पर राजस्थान गो सेवा समिति एवं गोग्राम संघ के प्रतिनिधियों ने सुझाव दिया कि यदि निराश्रित नर गोवंश के पालन-पोषण हेतु गौशालाओं को ही 12 माह का अनुदान उपलब्ध करा दिया जाए तो अधिकांश गौशालाएं इन गोवंशों को अपने संरक्षण में लेने के लिए तैयार हो जाएंगी तथा प्रदेश में निराश्रित नर गोवंश की समस्या का व्यावहारिक एवं स्थायी समाधान संभव हो सकेगा।
गौशालाओं में पेयजल संकट के विषय पर राजस्थान उच्च न्यायालय के निर्देशों की अनुपालना में विभाग द्वारा 740 गौशालाओं की सूची तैयार किए जाने की जानकारी दी गई, जहां पानी की उपलब्धता नहीं है। विभाग ने बताया कि प्रथम चरण में लगभग 200 गौशालाओं में पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी, जिसमें कुल लागत का 90 प्रतिशत विभाग द्वारा तथा 10 प्रतिशत संबंधित संस्था द्वारा वहन किया जाएगा। इस प्रस्ताव पर दोनों संगठनों ने सहमति व्यक्त की। साथ ही विभाग द्वारा बताया गया कि नलकूप निर्माण का कार्य निविदा प्रक्रिया के माध्यम से कराया जाएगा तथा भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार प्रति नलकूप लागत लगभग ₹25 लाख तक हो सकती है। इस पर दोनों संगठनों ने सुझाव दिया कि कार्यकारी एजेंसी के रूप में संबंधित गौशालाओं को ही कार्य करने का अवसर दिया जाए, जिससे कार्य अधिक पारदर्शी, गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध रूप से सम्पन्न हो सके।
महालेखाकार (AG) ऑडिट के आधार पर 38 गौशालाओं के विरुद्ध प्रस्तावित रिकवरी के संबंध में भी विस्तृत चर्चा हुई। विभाग ने आश्वस्त किया कि संबंधित संयुक्त निदेशकों द्वारा पूर्व में किए गए भौतिक सत्यापन एवं अन्य अभिलेखों की पुनः जांच कराई जाएगी। यदि किसी स्तर पर अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही पाई जाती है तो उसके विरुद्ध विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही विभाग ने यह भी आश्वासन दिया कि ऑडिट रिकवरी के प्रकरणों पर गंभीरता से कार्य किया जा रहा है तथा शीघ्र ही आवश्यक निर्णय लेकर उचित कार्यवाही की जाएगी।
इस बैठक में राजस्थान के दोनों गौ गोशाला संगठनों ने शामिल होकर अपनी अपनी बाते रखी।
गौ ग्राम सेवा संघ राजस्थान व
राजस्थान गौ सेवा समिति के पदाधिकारियों ने भाग लिया यथा
सूरजमाल सिंह नीमराणा कार्यकारी प्रेदश अध्यक्ष गौ ग्राम सेवा संघ राजस्थान ,प्रकाश व्यास जोधपुर प्रदेश महामंत्री गौ ग्राम सेवा संघ राजस्थान ,गोपालसिंह नथावत प्रदेश मंत्री बीकानेर ,महेश व्यास जोधपुर , देवकीनंदन सोनी प्रदेश मंत्री चुरू परम पूज्य संत गोविन्दराम शास्त्री (खेड़ापा धाम) प्रदेशाध्यक्ष, पुज्य संत गोविन्दवल्लभ महाराज (श्रीपति धाम सिरोही) प्रदेशाउपाध्यक्ष, रघुनाथसिंह राजपुरोहित सलाहकार राजस्थान गौ सेवा समिति ,भगवतीप्रसाद प्रदेश सचिव प्रदेश सचिव राजस्थान गौ सेवा समिति ,महेंद्रसिंह जी चारण, ने भाग लिया।


