बता रही तिरे चेहरे की ये उड़ी रंगत, किसी ने आज तिरे मुंह पे कह दिया है सच
टुडे राजस्थान न्यूज़
बीकानेर-29 जनवरी। पर्यटन लेखक संघ-महफिले अदब के सप्ताहिक अदबी कार्यक्रम की 565 वीं कड़ी के तहत रविवार को होटल मरुधर हेरिटेज में तरही मुशायरा-7 का आयोजन रखा गया जिसका मिसरा ए तरह था-हमारे जिस्म में खूं बनके दौड़ता है सच।”
सदारत करते हुए इम्दादुल्लाह बासित ने सच और झूट पर यूं शेर सुनाया-
है साथ झूट के इक भीड़ बेज़मीरों की
ख़िलाफ़ ज़ुल्म के तन्हा डटा हुआ है सच

मुख्य अतिथि अब्दुल जब्बार जज़्बी ने यूँ सच बयान किया-
बता रही तिरे चेहरे की ये उड़ी रंगत
किसी ने आज तिरे मुंह पे कह दिया है सच
आयोजक डॉ ज़िया उल हसन क़ादरी ने ग़ज़ल सुना कर वाह वाही लूटी-
मियां!हमारी तो घुट्टी में यूं मिला है सच
“कि जैसे जिस्म में खूँ बन के दौड़ता है सच”

उर्दू अकादमी सदस्य असद अली असद ने ग़ज़ल सुना कर दाद हासिल की-
कोई तो मसलेहते-वक़्त रोकती है उसे
वो बोलना तो हमेशा ही चाहता है सच
कैलाश टाक ने ख़ुद को आज़माने की बात कही-
कि आज़मा भी लो,इल्ज़ाम मत लगाओ अब
“हमारे जिस्म में खूं बनके दौड़ता है सच “
वरिष्ठ शाइर ज़ाकिर अदीब की ग़ज़ल ज़िया उल हसन क़ादरी ने पढ़ी-
हमारे जिस्म को आदत सी हो गई सच की
रगों में ख़ून नहीं बल्कि दौड़ता है सच
इजीनियर निर्मल कुमार शर्मा की ग़ज़ल भी पढ़ी गई-
सच देखना हो गर नजर भी सच की चाहिए
सच देख-सुन सके वही जो सोचता है सच
संचालन डॉ ज़िया उल हसन क़ादरी ने किया।राजकुमार ग्रोवर ने आभार व्यक्त किया।




