देखो एक युनिट रक्त में, घरेलू रिश्ता बन गया

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टुडे राजस्थान न्यूज़ (अज़ीज़ भुट्टा )

रक्तदान ऐसा दान, जो बिना ख़र्च सैकड़ों बार.. दो बार जीवन जी जाएं वो है रक्तदान

धरती पर चलता फिरता भगवान है, जो निस्वार्थ करता रक्तदान है

देखो एक युनिट रक्त में, घरेलू रिश्ता बन गया।।…

सेवा कार्य मानव जीवन की एक सुखमय सीढ़ी है

बीकानेर 14 जून । राष्ट्रीय कवि चौपाल 572 वीं कड़ी सामयिक विषय रक्तदान नैत्रदान को समर्पित रही आज के कार्यक्रम अध्यक्षता में समाज सेवी, महा रक्तदानी दिनेश भदोरिया, मुख्य अतिथि में रक्त दानी वरीष्ठ साहित्यकार, राजनैत्री समाज सेविका श्रीमती सुधा आचार्य, विशिष्ट अतिथि में समाज सेवी रक्तदानी मौहम्मद सलीम भाटी एवं स्वर्ण कला साधक समाज सेवी रक्तदानी योगेश महेचा आदि मंच सुशोभित हूए।

कार्यक्रम शुभारम्भ करते हुए रामेश्वर साधक ने काव्य धारा में कहा कि रक्तदान ऐसा दान, जो बिना ख़र्च सैकड़ों बार.. बाद मृत्यु नैत्रदान, जो जगत फिर से दिखाएं दूसरी बार। 190 बार के रक्तदाता आज के कार्यक्रम अध्यक्ष में दिनेश भदोरिया ने कहा कि रक्तदान नैत्रदान देहदान सभी सर्वोत्तम है पर जीते जी अंतिम यात्रा में सहभागी बनना भी सत्कर्मों के हेतु प्रभो सान्निध्य भी है,.. डॉ हरिदास हर्ष ने .. उमड़ती भीड़ में उभरता करूण क्रंदन व्यथित कर रहा जन समूह को.. काव्य धारा में बात रखते हुए कहा आयूर्वैद का विश्लेषण से हमारे ऋषि मुनियों के स्वास्थ्य योगदान को आत्मसात किया जावे,.. 35 बार रक्तदात्री मुख्य अतिथि राजनैत्री सुधा आचार्य ने बताया कि सन् 1818 से आरम्भ अब तक के रक्तदान की पूर्ण महत्ता बताते हुए कई ऐतिहासिक,रौचक जानकारियां दी, 60 से अधिक बार रक्तदाता मोहम्मद सलीम भाटी ने बहु चर्चित राष्ट्रीय कवि पिता मौहम्मद सदीक की कालजयी कविता सुनाते हुए कहा कि बिना सत्कर्म किये मर जाएंगे, समझो जीवन अधुरा है,.. 60 से अधिक बार रक्तदाता योगेश महेचा ने स्व बौद्धिक में कहा सेवा कार्य मानव जीवन की एक सुखमय सीढ़ी है।

कैलाश टाक : औरों के लिए जो देता जी – जान है। धरती पर चलता फिरता भगवान है, जो निस्वार्थ करता रक्तदान है,.. बम चकरी : कांई हुवे घाटो, कांई हुवे फायदों। हुँ गतमरियो, पण जाणु बहन बेटी रो कायदो।। शिव दाधीच बीकानेरी : मेरी मौत पर प्रश्नचिह्न खड़े मत कर ऐ यार मेरे,जो दायित्व विधाता ने सौंपे थे, पूर्ण कर लौट गया मैं तेरे। रामेश्वर साधक : आहा..! पर-देह में मेरा रक्त संचरित, देखो एक युनिट रक्त में धर्म में, घरेलू रिश्ता बन गया।।…प्रमोद कुमार शर्मा : मैं तेरे लिए, तूं मेरे लिए, ओ नोनू बीटियां सुन, सदा सर्वदा गाया करना राम नाम की धून,.. कासिम बीकानेरी : हर काम का तो वक़्त मुक़र्रर है दोस्तो, हां, वक़्त ही तो असली सिकन्दर है दोस्तो…
*इसी बीच राष्ट्रीय कवि चौपाल समूह के द्वारा चार रक्तदाताओं.. दिनेश भदोरिया, सुधा आचार्य, योगेश महेचा एवं मोहम्मद सलीम भाटी का श्री फल, शाॅल, रत्न जड़ित मोतीयन माला के साथ आत्मीय स्वागत अभिनन्दन किया गया एवं उनकी जीवनचर्या का गुणगान किया गया।

सरदार अली परिहार : हवा नदी की तरह अविरल तूं चलता चल,.. कृष्णा वर्मा : जीवन भगवान का दिया एक अनमोल तोहफा है, दौलत शौहरत, रिश्ते नाते जीवन से ही सम्भव है,… मेहराजुद्दीन एडवोकेट : कभी खुद से बात करो सुकन मिलेगा, हर दर्द का हल ख़ुद ही में मिलेगा,… पवन कुमार चड्ढ़ा : कल चमन था आज एक सेहरा हुआ, देखते ही देखते ये क्या हुआ शिव प्रकाश शर्मा सामयिक विषय पर रचना सुनाई।

आज के कार्यक्रम में 17 महानुभाव ने प्रस्तुतियां दी तथा कार्यक्रम में राधा किशन सोनी, सुरेन्द्र महेचा, अनिल योगी पत्रकार, घनश्याम सौलंकी छोटू खां पत्रकार भवानी सिंह, युसुफ, मेघराज, ऋषि कुमार, आदि कई गणमान्य साहित्यानुरागी उपस्थित रहे कार्यक्रम संचालन आध्यात्म शैली में साधक ने किया तथा आभार व्यक्त कैलाश टाक ने किया ।

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