धर्म सम्राट करपात्री के आह्वान पर गोरक्षा महाभियान चला- श्रीमाली
टुडे राजस्थान न्यूज़ (अज़ीज़ भुट्टा )
बीकानेर 20 अगस्त । नोखा में चातुर्मास कर रहे दंडी संन्यासी स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती ने सत्संग पंडाल में दंडकवन में श्री राम की प्रतिज्ञा – निशिचर हीन करहुं मही की ओजस्वी व्याख्या की।
स्वामी जी ने दंडकवन के ऋषि – महर्षियों तथा राम – सीता संवाद का सार बताते हुए कहा कि इन आदर्शों को जीवन में उतार कर आदर्श गृहस्थ बनें। राष्ट्र रक्षा स्वत: हो जावेगी।
करपात्री जी जयन्ती – चौमासा स्थल में विशेष आमंत्रित शिक्षाविद् जानकी नारायण श्रीमाली ने करपात्री जयन्ती पर कहा कि धर्म सम्राट करपात्री के आह्वान पर गोरक्षा महाभियान चला, वह सनातन धर्म का महान् उत्कर्ष था श्रीमाली द्वारा करपात्री जी के संस्मरण सुनाने पर विशाल जनमेदिनी हर्षनाद कर उठी।

तुलसी जयंती – तुलसी जयंती के प्रसंग से श्रीमाली ने कहा कि तुलसी और राम चरितमानस भारत की आत्मा है। राम चरित मानस विश्व में सबसे अधिक छपने और पढ़ा जाने वाला धर्मग्रन्थ है। जहां हिन्दू है, वहां मानस है। राम चरित मानस पढ़कर सर विलियम जोन्स ने कहा – यही है हिन्दुओं की मृत संजीवनी। मानस समाज में मर्यादा और राष्ट्र भक्ति का भाव जगाता है। पंद्रहवीं सोलहवीं शताब्दी में जब मुसलमान शासकों के अत्याचार पराकाष्ठा पार कर रहे थे, तब तुलसी और मानस के आह्वान पर हनुमान के आदर्श प्रेरित युवाशक्ति ने मुगल राज्य की नींव हिलादी। श्रीमाली ने तुलसी और खानखाना रहीम के दोहों से समा बांध दिया।

राती घाटी ग्रन्थ भेंट – श्रीमाली ने कहा राव बीकाजी के पौत्र राव जैतसी ने बाबर द्वारा राम मंदिर ध्वंस का बदला लेने के लिए बीकानेर में बाबर के पुत्र व गजनी के शासक कामरां को धूल चटाई। इस राती घाटी युद्ध का जयघोष था – राम! राम!
इसके साथ ही श्रीमाली ने राती घाटी युद्ध उपन्यास स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती को भेंट किया।
मंच पर विराजमान वृद्ध दंडी संन्यासियों और तपस्वी युवा ब्रह्मचारियों सहित शत – शत सभासदों ने राम! राम! का जयघोष किया।





