टुडे राजस्थान न्यूज़ ( अज़ीज़ भुट्टा )
शिक्षा, संस्कार और सामाजिक समरसता के मंथन का मंच बना जिला स्तरीय शैक्षिक सम्मेलन
अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ राजस्थान (विद्यालय शिक्षा), बीकानेर का दो दिवसीय शैक्षिक सम्मेलन प्रारंभ
बीकानेर/ गंगाशहर, 18 सितम्बर। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ राजस्थान (विद्यालय शिक्षा), जिला बीकानेर के तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय जिला स्तरीय शैक्षिक सम्मेलन का शुभारंभ शुक्रवार को मोदी बगेची, गोपेश्वर बस्ती, गंगाशहर में हुआ।

सम्मेलन में बीकानेर जिले के विभिन्न खण्डों से बड़ी संख्या में शिक्षक-शिक्षिकाओं ने सहभागिता की। सम्मेलन में शिक्षा, शिक्षक, शिक्षार्थी, संस्कार, संस्कृति, पर्यावरण, सामाजिक समरसता एवं विद्यालय विकास से जुड़े विषयों पर विभिन्न सत्रों में विचार-विमर्श किया गया।
उद्घाटन सत्र में विद्यालय को संस्कार एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का केंद्र बनाने पर जोर
उद्घाटन सत्र में माननीय विभाग संघ चालक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ टेकचंद जी बरड़िया, मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी अरुण शर्मा, प्रदेश सचिव ABRSM रवि आचार्य, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य ओमप्रकाश विश्नोई सहित पदाधिकारियों ने विचार व्यक्त किए।

मुख्य अतिथि टेकचंद जी बरड़िया ने कहा कि शिक्षा केवल पाठ्यक्रम पूर्ण करने तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों में संस्कार, राष्ट्रबोध और सामाजिक उत्तरदायित्व विकसित करना भी शिक्षक का महत्वपूर्ण दायित्व है।
अध्यक्षता करते हुए मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी अरुण शर्मा ने कहा कि विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ सकारात्मक एवं संस्कारयुक्त वातावरण निर्माण पर विशेष ध्यान दिया जाने का आव्हान किया।
प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य ओमप्रकाश विश्नोई ने कहा कि शिक्षक समाज परिवर्तन का महत्वपूर्ण माध्यम है। शिक्षक अपनी भूमिका को केवल शिक्षण कार्य तक सीमित न रखते हुए विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में योगदान दें।

जिलाध्यक्ष दानाराम भादू ने सम्मेलन के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ऐसे आयोजन शिक्षकों को अपने अनुभव साझा करने तथा शिक्षा व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए सामूहिक चिंतन का अवसर प्रदान करते हैं।
उद्घाटन सत्र का संचालन मोनिका गौड़ ने किया।
दूसरे सत्र में संत रविदास जी के जीवन एवं सामाजिक समरसता पर मंथन
दूसरे सत्र में संत रविदास जी के प्राकट्य के 650 वर्ष पूर्ण होने के संदर्भ में उनके जीवन, विचारों एवं सामाजिक समरसता के संदेश पर चर्चा की गई।
सत्र में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ राजस्थान के पश्चिम क्षेत्र प्रमुख दिग्विजय सिंह अतिथि के रूप में उपस्थित रहे तथा मुख्य वक्ता श्रीमती सुनीता खीचड़ ने संत रविदास जी के जीवन-दर्शन पर विचार रखे।
जिला संगठन मंत्री श्रीमती सुनीता खीचड़ ने कहा कि संत रविदास जी ने अपने जीवन और विचारों के माध्यम से सामाजिक समरसता, समानता, मानव-मर्यादा और भक्ति का संदेश दिया। उनके विचार आज भी समाज में समरसता और नैतिक मूल्यों को मजबूत करने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को महापुरुषों के जीवन और विचारों से जोड़ना शिक्षा के संस्कार पक्ष को मजबूत करता है।
मुख्य अतिथि दिग्विजय सिंह ने संगठन की कार्यप्रणाली, संगठन विस्तार, बालक के सर्वांगीण विकास एवं समाज में शिक्षक की भूमिका पर विचार रखते हुए संगठन की कार्यप्रणाली को मजबूत करते हुए अधिकाधिक शिक्षकों को संगठन से जोड़ने, विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण एवं संस्कारयुक्त शिक्षा के माध्यम से बालकों के सर्वांगीण विकास तथा समाज में शिक्षक की गरिमामयी भूमिका को प्रभावी बनाने पर जोर दिया।
सत्र का संचालन जिला महिला मंत्री श्रीमती बबीता वर्मा ने किया।
तीसरे सत्र में ‘हमारा विद्यालय हमारा तीर्थ’ एवं प्रभावी प्रार्थना सभा पर चर्चा
तृतीय सत्र में ‘हमारा विद्यालय हमारा तीर्थ एवं प्रभावी प्रार्थना सभा’ विषय पर विचार-विमर्श हुआ।
सत्र में प्रदेश सचिव रवि आचार्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे तथा वरिष्ठ उपाध्यक्ष अनिल सोनी ने अध्यक्षता की।
प्रदेश सचिव रवि आचार्य ने कहा कि विद्यालय केवल भवन नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण, संस्कार एवं जीवन मूल्यों के विकास का केंद्र है। विद्यालय की प्रार्थना सभा को विद्यार्थियों की रुचि, सहभागिता और संस्कार विकास से जोड़कर प्रभावी बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रार्थना सभा के माध्यम से महापुरुषों के जीवन प्रसंग, पर्यावरण संरक्षण, राष्ट्रबोध एवं सामाजिक दायित्व जैसे विषय विद्यार्थियों तक सहज रूप से पहुंचाए जा सकते हैं।
वरिष्ठ उपाध्यक्ष अनिल सोनी ने कहा कि शिक्षक अपने विद्यालय को अपना तीर्थ मानकर कार्य करें तो विद्यालय का वातावरण सकारात्मक, संस्कारयुक्त और प्रेरणादायी बनाया जा सकता है। उन्होंने शिक्षकों से विद्यालय विकास में सामूहिक सहभागिता का आह्वान किया।
सत्र का संचालन श्रीराम खिलेरी ने किया।
सम्मेलन के विभिन्न सत्रों में विद्यालय को संस्कार, संस्कृति एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का तीर्थ बनाने, प्रभावी प्रार्थना सभा, संत रविदास जी के विचार, पर्यावरण संरक्षण, ‘एक शिक्षक-एक वृक्ष’, शिक्षा में नवाचार, अनुशासन, विद्यार्थी हित एवं विद्यालय प्रबंधन जैसे विषयों पर मंथन किया जा रहा है।
सम्मेलन में जिलाध्यक्ष दानाराम भादू, मंडल सयुक्त मंत्री विनोद पुनिया, अतिरिक्त जिलामंत्री मोहम्मद फैसल, संगठन मंत्री अमित गुरिया,जिला उपाध्यक्ष जगदीश मंडा,अलसीराम विश्नोई,विकास पंवार, बहादुर सिंह, मोहम्मद रमजान, महावीर धतरवाल, सुगनाराम गुरिया,सूर्यप्रकाश,पूनमचंद गोदारा,महेश छीपा, जितेन्द्र सिंह, अशोक पवार,सहित महासंघ के पदाधिकारी एवं जिले के विभिन्न खण्डों से आए शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित रहे।


