आचार्य महाश्रमण जी आज पहुंचे केसरदेसर, गुरुवार को मोरखाना में

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इंद्रियों का करे सदुपयोग – आचार्य महाश्रमण

– ग्रामीण अंचल में गतिमान शांतिदूत पहुंचे आज केसरदेसर

– गुरूदेव ने सदाचारयुक्त जीवन जीने के लिए किया प्रेरित

केसरदेसर, बीकानेर 01 जून। अपनी सप्तवर्षीय अहिंसा यात्रा द्वारा नेपाल, भूटान सहित भारत के 20 राज्यों में जनता के मध्य नैतिकता, सद्भावना एवं नशामुक्ति की सौरभ महकाने वाले शांतिदूत युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी वर्तमान में बीकानेर के ग्रामीण अंचल में विचरण कर रहे है। अपनी पदयात्रा द्वारा कई जगह कच्चे मार्ग तो कहीं टूटी–फूटी सड़कों को पार कर भी आचार्यश्री नित नए ग्रामों में जाकर ग्रामीणों को शांति, अहिंसा का संदेश प्रसारित कर रहे है।

आज प्रातः आचार्यश्री ने गाढवाला से मंगल विहार किया। विहार के दौरान आसपास के अनेक क्षेत्रों से भी श्रावकजन यात्रा में संभागी बने हुए थे। लगभग 13 किलोमीटर का विहार कर शांतिदूत केसरदेसर में पधारे। इस दौरान स्थानीय ग्रामीणों ने आचार्यश्री का भावभीना स्वागत किया। राजकीय आदर्श उच्च माध्यमिक विद्यालय में आचार्य श्री का प्रवास हुआ।

धर्म सभा में प्रवचन करते हुए आचार्यश्री ने कहा– हमारे इस मानव शरीर में स्पर्श, रस, घ्राण, चक्षु एवं श्रोत ये पांच इंद्रियां होती है। मनुष्य में पांचों इंद्रियां एवं मन होता है इसके कारण सभी प्राणियों में मनुष्य सबसे विकसित है। हमारी इन इंद्रियों का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए यह ध्यान देने की बात है। मन का उपयोग अच्छे चिंतन, सदुपयोग में लगे यह जरूरी है। इंद्रियां ज्ञान की साधन है तो इनसे भोग भी भोगा जाता है।

हमारी इंद्रियों का उपयोग संत दर्शन, शास्त्र श्रवण आदि कार्यों में होना चाहिए। जैसे कमल कीचड़ में रहकर भी निर्लिप्त रहता है उसी प्रकार भोगों को भोगते हुए भी उनमें अति आसक्ति नहीं होनी चाहिए। गार्हस्थ्य जीवन में रहकर भी जीवन धार्मिकता से परिपूर्ण होना चाहिए। साधु–संत कंचन और कामिनी के त्यागी होते हैं। ऐसे साधु-संतों के तो दर्शन मात्र से पाप झड़ जाते हैं। जीवन में संतों की वाणी सुनकर सदाचार अपनाएं तो व्यक्ति अपने जीवन को सफल बना सकता है।

इस अवसर पर साध्वी ज्योतिश्री जी, साध्वी जितेंद्रप्रभा जी ने अपने विचार रखे। विद्यालय की प्रिंसिपल डॉ. वीना गहलोत ने स्वागत में वक्तव्य दिया। केसरदेसर तेरापंथ समाज की महिलाओं ने गीत का संगान किया।

कल मोरखाना पधारेंगे शांतिदूत
02 जून को आचार्यश्री का प्रवास देवी सुसवाणी माता मंदिर के लिए प्रसिद्ध मोरखाना में रहेगा। वहां से 03 को सालुडीया, 04,05 को नोखा मंडी, 06 को नोखा गांव, 07 को भामटसर, 08 को रासीसर, 09 को देशनोक में संभावित है।

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