श्रीपूज्यजी का शोभायात्रा जगह-जगह वंदन, अभिनंदन

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विपिन मुसरफ बड़ा उपासरा ट्रस्ट के ट्रस्टी
बीकानेर, 05 फरवरी। खरतरगच्छ में दादा गुरुओं व यति परम्परा के गच्छाधिपति श्रीपूज्य जिनचन्द्र सूरिश्वरजी के तीन दिवसीय पाटोत्सव के अंतिम दिन गाजे बाजे से शोभायात्रा निकली। खुली कार में बैठे श्रीपूज्यजी का मार्ग में अनेक स्थानों पर वंदन अभिनंदन किया गया। उन्होंने भी श्रावक-श्राविकाओं को मंगलभावना के साथ आशीर्वाद दिया। गंगाशहर रोड की पाश्र्वचन्द्र सूरिश्वरजी की दादाबाड़ी से शोभायात्रा में भगवान महावीर की पालकी में सवारी, इंद्र ध्वजा व धर्म पताकांए, शंख, छत्र, चंवर, छड़ी के साथ गुरुदेव श्रीपूज्यजी, यतिवर्यश्री अमृृत सुन्दरजी, मुमुक्षु विकास चैपड़ा, इंदिरा नाहर, अंजली राखेचा, बड़ा उपासरा की प्राचीन परम्परा की सचेतन झांकियां, दादा गुरुदेव व भगवान महावीर के संदेश, श्रीपूज्यजी की पट्परम्परा की झांकियां शामिल थीं।

बैंड पार्टी, ढोल व तासों के साथ श्रावक-श्राविकाएं नृृत्य करते हुए जयकारा लगा रहे थे। कुशल विद्यापीठ, जैन गुरुकुल संस्थान कुशलायतन, नाल, बेगानी चैक की एल.के.एस.कन्या विद्यालय की छात्राएं हाथ में पंचरंगी जैन ध्वज लिए हुए चल रहीं थीं। देश के विभिन्न इलाकों से आएं श्रावक-श्राविकाएं अपने क्षेत्र की भाषा व वेशभूषा में अलग ही पहचान बनाएं हुए थे। शोभायात्रा गोगागेट, ढढ््ढों का चैक, बेगानियों का चैक, डागा सेठिया पारख चैक, कोठारी मोहल्ला, दस्साणी चैक होते हुए रांगड़ी चैक के बड़ा उपासरा पहुंचकर संपन्न हुई।


बड़ा उपासरा में श्रीपूज्यजी की पाट परम्परा उनके जीवन आदर्शों से संबंधित वृृतचित्र सुप्रसिद्ध नर्तक व कोरियोग्राफर डाॅ.श्रेयांस जैन के नेतृृत्व में प्रदर्शित किया गया। पीन्टू स्वामी, महेन्द्र कोचर ने गुरुभक्ति के गीतगाकर उपस्थित लोगों को थिरकने पर मजबूर कर दिया। समारोह में विपिन मुसरफ को बडा उपासरा खरतरगच्छ श्रीसंघ बीकानेर का ट्रस्टी मनोनीत किया गया। खरतरगच्छ श्रीसंघ के रतन लाल नाहटा, पवन पारख, मनोज सेठिया, नरेन्द्र मनु मुसरफ, मनोज सेठिया, पूनमचंद नाहटा, विपिन मुसरफ ने कंबली ओढ़ाकर व सूरत के कमलेश भाई, रामजी भाई, बीकानेर के के.एल. नाहटा परिवार ने वासक्षेप पूजा का लाभ लिया।


श्रीपूज्यजी ने प्रवचन में चारों दादागुरुदेवों, गुरु इकतीसा की बीकानेर के रांगड़ी चैक के बड़ा उपासर में रचना, यति व उसकी पट्परम्परा का स्मरण दिलाते हुए कहा कि सभी चरित्र आत्माआंे ने जैन धर्म, संस्कार व संस्कृृति के लिए कार्य किया। भगवान महावीर के शासन की शोभा में श्रीवृृद्धि की । उन्होंने कहा कि पाटोत्सव सत्य साधना का महापर्व व उत्सव है। गुरुवर यति स्वतंत्रता सेनानी ने भगवान महावीर के समय से प्रतिष्ठित सत्य साधना को सिखाया व आगे बढ़ाया। भगवान महावीर की परम्परा का सत्य साधना सबसे बड़ा उपहार है। यह विश्व, राष्ट्र, समाज, संस्कृृति, संस्कार व धर्म को बचाने का अमोघ उपाय है। सत्य साधना में समता व सजगता दो पहिएं है उनके सहारे चलते हुए अपने कदम बढ़ाते रहेें। अपने मन, इंद्रियों पर नियंत्रण रखे तथा निर्लिप्ता से प्रत्येक प्राणी के प्रति करुणा, सदभाव, मैत्री भाव रखे।


रविन्द्र रंगमंच में श्रीपूज्यजी के जीवन पर नाट््य प्रस्तुति
शनिवार को शिक्षा मंत्री डाॅ.बुलाकी दास कल्ला, महापौर सुशीला कंवर राजपुरोहित एवं संभागीय आयुक्त नीरज के पवन के आतिथ्यि में हुए कार्यक्रम में उज्जैन की त्रिनेत्र सांस्कृृतिक संस्थान की ओर से गुरुदेव के जीवन आदर्शों पर आधारित कार्यक्रम ’सत्य साधक’ नाटक की प्रस्तुति दी। कुशल विद्यापीठ नाल के छात्र-छात्राओं नवंकार महामंत्र व सत्य साधना पर आधारित नृृत्यों की प्रस्तुति डाॅ.श्रेयांस जैन के नेतृृत्व में की। अतिथियों का अभिनंदन किया गया।

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