देहदान का संकल्प पत्र सौंपा

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टुडे राजस्थान न्यूज़ ( अज़ीज़ भुट्टा )


बीकानेर 21 जून । मृत्यु शाश्वत है हर कोई यही जानता है तथा प्रत्येक व्यक्ति यह भी चाहता है कि वह जाते जाते कुछ ऐसा कर जाए कि हमेशा के लिए एक मिसाल बन जाए।
जिस व्यक्ति को अपने खराब अंगों के कारण जिंदगी चलाने के लिए किसी अंग की जरूरत होती है तो वह दूसरे व्यक्तियों पर ही निर्भर होता है कि अंग बाजार में तो मिलते नहीं। ऐसे व्यक्ति को यदि उसकी जरूरत का अंग मिल जाता है तो उसको एक नई जिंदगी मिलती है।
अंगदान जीवित व्यक्ति भी दे सकता है तथा मृत्यु के उपरांत भी दे सकते हैं।

ऐसे व्यक्ति जो किसी कारण से brain-dead हो जाते हैं तथा उनके बचने की कोई संभावना नहीं रहती तो उन के बहुत सारे अंग बहुत व्यक्तियों को काम आ सकते हैं। कई लोगों के मन में यह मिथ्या धारणा होती है कि यदि हमने कोई अंग दान कर दिया और अंतिम संस्कार उसके बिना किया तो अगले जन्म में उस व्यक्ति को वह अंग नहीं मिलेगा, यह बहुत ही हास्यास्पद है तमृत्यु शाश्वत है हर कोई यही जानता है तथा प्रत्येक व्यक्ति यह भी चाहता है कि वह जाते जाते कुछ ऐसा कर जाए कि हमेशा के लिए एक मिसाल बन जाए।
जिस व्यक्ति को अपने खराब अंगों के कारण जिंदगी चलाने के लिए किसी अंग की जरूरत होती है तो वह दूसरे व्यक्तियों पर ही निर्भर होता है कि अंग बाजार में तो मिलते नहीं। ऐसे व्यक्ति को यदि उसकी जरूरत का अंग मिल जाता है तो उसको एक नई जिंदगी मिलती है।
अंगदान जीवित व्यक्ति भी दे सकता है तथा मृत्यु के उपरांत भी दे सकते हैं। ऐसे व्यक्ति जो किसी कारण से brain-dead
हो जाते हैं तथा उनके बचने की कोई संभावना नहीं रहती तो उन के बहुत सारे अंग बहुत व्यक्तियों को काम आ सकते हैं। कई लोगों के मन में यह मिथ्या धारणा होती है कि यदि हमने कोई अंग दान कर दिया और अंतिम संस्कार उसके बिना किया तो अगले जन्म में उस व्यक्ति को वह अंग नहीं मिलेगा, यह बहुत ही हास्यास्पद है तथा संकीर्णथा संकीर्ण सोच का परिणाम है।

किसी भी धर्म में अंगदान करना या अंग प्रत्यारोपण खुद के लिए भी करवाना कहीं से भी निषेध नहीं है। महर्षि दधीचि ने तो स्वयं भगवान इंद्र के धनुष के लिए अपने देह का दान किया था। यहां देहदान से भावी चिकित्सकों की शिक्षा को बहुत योगदान मिलेगा।
क्या आप जानते हैं किस सिर्फ हमारे देश में ही अंगों की कमी के कारण लगभग 500000 व्यक्ति प्रतिवर्ष काल ग्रसित हो जाते हैं।
200000 व्यक्ति लिवर की खराबी के कारण मृत्यु को प्राप्त होते हैं।
लगभग 50000 व्यक्ति दिल की बीमारियों के कारण खत्म हो जाते हैं ,जो यदि अंग मिल जाते तो बच सकते थे।
लगभग डेढ़ लाख व्यक्ति किडनी या गुर्दे की इंतजार में अपना जीवन समाप्त कर लेते हैं उनमें से मुश्किल से 5000 को ही मिल पाती है।
लगभग 1000000 व्यक्ति कॉर्निया की आवश्यकता के कारण, जो नहीं मिल पाती उनको ,अंधेपन का जीवन व्यतीत करते हैं।
हमें सिर्फ अपनी सोच तैयार करनी है कि क्यों ना मरने के बाद भी हमारे अंग किसी के काम आए किसी को जिंदगी मिले किसी का परिवार चलें। अंतिम संस्कार के बाद शरीर या तो जला दिए जाते हैं या जमीन में गाड़ दिए जाते हैं ,यानी किसी के काम नहीं आ पाते।
इन्हीं भावनाओं के तहत ग्राम नाथूसर तहसील नोखा के पूर्व सरपंच घेवर चंद सियाग तथा मोतीराम रोड ने सर्व मानव कल्याण समिति के सानिध्य में अपने देहदान तथा अंगदान का निर्णय लेकर शपथ पत्र भरा है। समिति के अध्यक्ष डॉ राकेश रावत ने बताया कि उनके साथ आए युवाओं ने भी इस कार्यक्रम को जानकर इसमें अपनी रुचि दिखाई तथा शीघ्र ही अपनी देह तथा अंगदान करने का मानस बनाया है, यह अपने आप में बहुत अच्छा संकेत है लोगों में जागृति होने का। दोनों का समस्त बुद्धि जनों द्वारा आभार प्रकट किया।

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